चंडीगढ़, 22 सितंबर 2026: पंजाब में चलाया जा रहा ‘युद्ध नशेआं विरुद्ध’ अभियान अब केवल पारंपरिक पुलिस कार्रवाई तक सीमित नहीं है, बल्कि नशे के ख़िलाफ़ पाँच सूत्रीय व्यापक रणनीति के रूप में आगे बढ़ रहा है, इसके तहत पुलिस, शिक्षक, सामुदायिक स्वयंसेवक, युवा और स्वास्थ्यकर्मी मिलकर नशे की आपूर्ति के नेटवर्क पर प्रहार करने, नशे की रोकथाम करने, सूचना तंत्र को मज़बूत करने और नशे की समस्या से जूझ रहे लोगों को समय पर उपचार उपलब्ध करवाने के लिए काम कर रहे हैं।
संदेश स्पष्ट है: पंजाब नशे के ख़िलाफ़ लड़ाई केवल पुलिस थानों से नहीं लड़ेगा। यह लड़ाई अब गाँवों, स्कूलों, कॉलेजों, समुदायों और स्वास्थ्य केंद्रों तक पहुँच रही है। जहाँ पुलिस नशे की आपूर्ति के नेटवर्क को ध्वस्त करने और नशा तस्करों के ख़िलाफ़ कार्रवाई करने में जुटी है, वहीं सामुदायिक प्रतिनिधि ज़मीनी स्तर पर निगरानी को मज़बूत कर रहे हैं, शिक्षक नशे की गिरफ़्त में आने से पहले ही ज़ोखिम की पहचान करने में मदद कर रहे हैं, जबकि युवा किशोरों और युवाओं के बीच नशे के ख़िलाफ़ जागरूकता, मानसिक दृढ़ता और स्वस्थ जीवनशैली को बढ़ावा दे रहे हैं। स्वास्थ्यकर्मी नशे की समस्या से जूझ रहे लोगों को उपचार की राह उपलब्ध करवा रहे हैं।
इस पहल का उद्देश्य नशा बेचना कठिन बनाना, नशे की तस्करी की सूचना देना आसान करना, युवाओं को नशे की ओर आकर्षित करना कठिन बनाना और नशे की लत से जूझ रहे लोगों के लिए उपचार प्राप्त करना आसान बनाना है। यह पाँच सूत्रीय रणनीति एनफोर्समेंट और रोकथाम के साथ-साथ रिहैबिलिटेशन को भी समान महत्त्व देती है और इस बात को दर्शाती है कि नशे के ख़िलाफ़ निरंतर लड़ाई के लिए समाज के हर स्तर की भागीदारी आवश्यक है।
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