नई दिल्ली, 3 जुलाई : केंद्र सरकार जीएसटी स्लैब में बड़े बदलाव पर विचार कर रही है। अगर वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) में क्षतिपूर्ति उपकर हटाने और स्वास्थ्य उपकर तथा स्वच्छ ऊर्जा उपकर लगाने का प्रस्ताव पारित हो जाता है तो कई चीजों की कीमतों में भारी इजाफा हो सकता है। अगर ऐसा होता है तो सिगरेट और वाहन जैसे तंबाकू उत्पाद महंगे हो सकते हैं। ‘पाप वस्तुओं पर स्वास्थ्य उपकर लागू होगा।
पाप वस्तुओं में सिगरेट, शराब, विलासिता की वस्तुएं और वाहन शामिल हैं। पाप वस्तुओं पर सरकार द्वारा अन्य वस्तुओं की तुलना में सबसे अधिक कर लगाया जाता है और वे 28 प्रतिशत के उच्चतम जीएसटी ब्रैकेट में आते हैं।
लग्जरी कारों और कोयले पर स्वच्छ ऊर्जा उपकर लगाया जा सकता है
इसके अलावा महंगी लग्जरी कारों और कोयले पर क्लीन एनर्जी सेस लगाया जा सकता है। एक मीडिया चैनल की रिपोर्ट के मुताबिक, सूत्रों ने बताया कि केंद्रीय वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी की अध्यक्षता में क्षतिपूर्ति उपकर पर मंत्रियों के समूह (जीओएम) की एक समिति इस महीने के अंत में इस मामले पर चर्चा कर सकती है।
मंत्रिसमूह पहले ही दो नए करों पर आम सहमति पर पहुंच चुका है, क्योंकि अधिकांश राज्यों द्वारा हानिकारक समझी जाने वाली वस्तुओं पर उच्च कर लगाने की संभावना है।
मध्यम वर्ग को राहत मिलेगी।’
जीएसटी के मौजूदा 4 स्लैब को घटाकर 3 करने पर भी चर्चा हो रही है। जीएसटी काउंसिल 12 फीसदी जीएसटी स्लैब को खत्म कर सकती है। सरकार 12 फीसदी जीएसटी स्लैब के तहत आने वाली वस्तुओं और सेवाओं को 5 फीसदी और 18 फीसदी स्लैब में शिफ्ट करने पर विचार कर सकती है।
हालांकि इस बदलाव पर काफी विचार करना होगा कि किन वस्तुओं को 5 फीसदी वाले स्लैब में शामिल किया जाए और किन वस्तुओं को 18 फीसदी वाले स्लैब में शामिल किया जाए। जानकारों का मानना है कि सरकार मध्यम वर्ग को ध्यान में रखकर बदलाव कर सकती है ताकि उसे राहत मिल सके।
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