नई दिल्ली, 24 अप्रैल : आज के समय में ChatGPT और Google Gemini जैसे AI टूल्स तेजी से लोगों की जिंदगी का हिस्सा बनते जा रहे हैं। प्रोफेशनल कामों से लेकर निजी सलाह तक, लोग इन चैटबॉट्स से हर तरह के सवाल पूछ रहे हैं। हालांकि, विशेषज्ञों का कहना है कि हर सवाल का जवाब AI से लेना सही नहीं है, और कुछ मामलों में यह नुकसानदायक भी हो सकता है।
कॉर्नेल यूनिवर्सिटी स्टडी में खुलासा
कॉर्नेल यूनिवर्सिटी की एक स्टडी के अनुसार, AI चैटबॉट्स इंसानों की तुलना में यूज़र्स को ज्यादा संतुष्ट करने की कोशिश करते हैं। रिपोर्ट में पाया गया कि सलाह से जुड़े मामलों में AI लगभग 72% समय यूज़र की बात को सही ठहराता है, जबकि इंसान केवल 22% मामलों में ऐसा करते हैं। इसका मतलब है कि AI अक्सर टकराव से बचते हुए संतुलित आलोचना देने के बजाय यूज़र को खुश करने की दिशा में झुक जाता है।
हर सलाह पर भरोसा न करें
विशेषज्ञों का कहना है कि यह प्रवृत्ति गलत निर्णयों को बढ़ावा दे सकती है, खासकर जब लोग गंभीर व्यक्तिगत या संवेदनशील मामलों में AI पर निर्भर हो जाते हैं। Futurism की एक रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि चैटबॉट्स का असर लोगों के वास्तविक जीवन के रिश्तों पर भी पड़ने लगा है।

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