नई दिल्ली/चेन्नई, 11 मार्च : अमेरिका-इज़राइल और ईरान के बीच बढ़ते टकराव के कारण पश्चिम एशिया में बने संकट और आयात में आई रुकावटों के बीच केंद्र सरकार ने प्राकृतिक गैस के वितरण में बदलाव किया है। जारी अधिसूचना के अनुसार अब घरेलू स्तर पर उत्पादित प्राकृतिक गैस की आपूर्ति एलपीजी उत्पादन इकाइयों को प्राथमिकता के आधार पर दी जाएगी।
अब तक सीएनजी (कंप्रेस्ड नेचुरल गैस) और पाइप्ड कुकिंग गैस ही ऐसे दो प्राथमिकता वाले क्षेत्र थे, जिन्हें देश में उत्पादित प्राकृतिक गैस की आपूर्ति की जाती थी।
एलपीजी को भी मिला प्राथमिकता क्षेत्र का दर्जा
देर रात जारी गजट अधिसूचना के बाद एलपीजी को भी प्राकृतिक गैस प्राप्त करने वाले प्राथमिकता क्षेत्रों की सूची में शामिल कर लिया गया है। संशोधित व्यवस्था के तहत अन्य क्षेत्रों को गैस देने से पहले एलपीजी, सीएनजी और पाइप्ड गैस निर्माताओं की जरूरतें पूरी की जाएंगी। इन क्षेत्रों को पिछले छह महीनों की औसत गैस खपत के आधार पर 100 प्रतिशत कोटा उपलब्ध कराया जाएगा।
ऊर्जा संकट का असर रेस्टोरेंट सेक्टर पर
पश्चिम एशिया में बने ऊर्जा संकट का असर भारत के रेस्टोरेंट उद्योग पर भी दिखाई देने लगा है। एलपीजी की कमी के कारण कई जगहों पर खाना बनाने की व्यवस्था प्रभावित हो रही है और मेन्यू सीमित किए जा रहे हैं। सरकार ने घरेलू उपभोक्ताओं को गैस आपूर्ति को सर्वोच्च प्राथमिकता दी है, जिसके कारण होटलों और रेस्टोरेंटों में उपयोग होने वाले कमर्शियल एलपीजी सिलेंडरों की आपूर्ति प्रभावित हो रही है।
नौकरियों पर भी पड़ सकता है असर
रेस्टोरेंट उद्योग से जुड़े लोगों का कहना है कि अगर यह स्थिति बनी रही तो कई रसोईघर बंद हो सकते हैं और कर्मचारियों की नौकरियां भी खतरे में पड़ सकती हैं। कई रेस्टोरेंट कम गैस में बनने वाले व्यंजन परोस रहे हैं या फिर ऐसे भोजन को प्राथमिकता दे रहे हैं, जिन्हें इलेक्ट्रिक उपकरणों पर तैयार किया जा सके। दिल्ली, मुंबई, चेन्नई और कोलकाता जैसे बड़े शहरों से ऐसे बदलाव की खबरें सामने आ रही हैं।
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