नई दिल्ली, 22 नवम्बर : चीन एक विशाल तैरता हुआ समुद्री अनुसंधान मंच बना रहा है जो परमाणु विस्फोट के झटके को झेलने में सक्षम है। विशेषज्ञों का कहना है कि यह परियोजना समुद्री क्षेत्र में वैश्विक प्रतिस्पर्धा को नया रूप दे सकती है। चीन की 14वीं पंचवर्षीय योजना के तहत राष्ट्रीय प्रमुख वैज्ञानिक अवसंरचना परियोजना के रूप में शामिल डीप-सी ऑल-वेदर रेजिडेंट फ्लोटिंग रिसर्च फैसिलिटी दुनिया का पहला मोबाइल, आत्मनिर्भर कृत्रिम द्वीप होगा।
scmp.com के अनुसार, यह 78,000 टन का, अर्ध-जलमग्न ट्विन-हल प्लेटफॉर्म है जो लंबे समय तक समुद्र में काम करने में सक्षम होगा। शंघाई जियाओ टोंग विश्वविद्यालय (SJTU) द्वारा विकसित यह प्लेटफॉर्म 138 मीटर लंबा, 85 मीटर चौड़ा और मुख्य डेक पर 45 मीटर ऊंचा होगा। इसकी क्षमता 238 लोगों की होगी, जो बिना किसी बाहरी आपूर्ति के 4 महीने तक यहां रह सकेंगे। इसकी गति 15 नॉट तक होगी।
परमाणु विस्फोट-प्रतिरोधी डिज़ाइन
हालाँकि इसे एक गैर-सैन्य परियोजना बताया गया है, लेकिन इसकी संरचना में परमाणु विस्फोटों से सुरक्षा के लिए सैन्य-स्तरीय तकनीक का इस्तेमाल किया गया है। एसजेटीयू के प्रोफेसर यांग देकिंग की टीम द्वारा प्रकाशित एक शोध पत्र के अनुसार, अधिरचना के घटक चीनी सैन्य मानक जीजेबी 1060.1-1991 का उपयोग करते हैं। इन संरक्षित कक्षों में बिजली, नौवहन और संचार के लिए महत्वपूर्ण प्रणालियाँ स्थापित होंगी।
उन्नत ‘मेटामटेरियल’ शॉक अवशोषक
भारी स्टील के बजाय, वैज्ञानिकों ने 60 मिमी मोटा मेटामटेरियल सैंडविच बल्कहेड विकसित किया है। यह ऋणात्मक पॉइसन अनुपात वाली नालीदार नलियों से बना है। यह परमाणु विस्फोट की तीव्र आघात तरंग को धीमे, नियंत्रित दबाव में परिवर्तित करता है, जिससे संरचना पर तनाव कम होता है।
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