नई दिल्ली, 23 जून : भारत में डिजिटल पेमेंट की लोकप्रियता दिन-ब-दिन बढ़ती जा रही है। यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (यू.पी.आई.) ने न सिर्फ पेमेंट प्रक्रिया को आसान बनाया है बल्कि इसे हर घर की जरूरत भी बना दिया है। बिल पेमेंट से लेकर छोटे-मोटे ट्रांजैक्शन तक क्कढ्ढ लोगों की पहली पसंद बन गया है। हालांकि, इसकी सुविधा के साथ-साथ साइबर क्राइम के मामले भी तेजी से बढ़ रहे हैं। इनमें यू.पी.आई. ऑटो-पे स्कैम एक नया और खतरनाक खतरा बनकर उभरा है। आइए इस स्कैम के बारे में विस्तार से जानते हैं और इससे कैसे बचा जा सकता है।
साइबर अपराधी गलत इस्तेमाल में लगे
नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (एन.पी.सी.आई.) के मुताबिक, साल 2024 में यू.पी.आई. के जरिए करीब 20.64 लाख करोड़ रुपये का लेन-देन दर्ज किया गया। जनवरी 2025 में यह आंकड़ा और बढ़ गया, जब 16.99 बिलियन ट्रांजेक्शन के साथ 23.48 लाख करोड़ रुपये से ज़्यादा का लेन-देन हुआ, लेकिन इसके साथ ही साइबर अपराधी यू.पी.आई. की सुविधाओं का गलत इस्तेमाल करके लोगों को निशाना बना रहे हैं।
स्कैमर्स बैंक या कस्टमर केयर अधिकारी बनकर कॉल करते हैं। वे ऑटो-पे को सक्रिय करने के लिए यूजर से यू.पी.आई. पिन या ओ.टी.पी. डालने के लिए कहते हैं। जैसे ही यूजर पिन डालता है, अकाउंट खाली हो जाता है।
यूपीआई ऑटो-पे का से नुकसान का डर
यूपीआई की खासियत यह है कि यह क्यूआर कोड या यूपीआई आईडी के जरिए तुरंत भुगतान की सुविधा देता है। इसी तरह एनपीसीआई ने 2020 में यूपीआई ऑटो-पे फीचर पेश किया, जो नियमित भुगतान को आसान बनाता है। इस फीचर के तहत मोबाइल रिचार्ज, बिजली बिल, क्रेडिट कार्ड बिल, बीमा प्रीमियम या लोन ईएमआई जैसी रकम यूजर की सहमति से तय तारीख पर अपने आप कट जाती है। इससे समय पर भुगतान और लेट पेनाल्टी से बचा जा सकता है। लेकिन साइबर अपराधी इस सुविधा का फायदा उठाकर लोगों को ठग रहे हैं।
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