नई दिल्ली, 6 जनवरी : भारत के मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने सोमवार को घोषणा की कि सुप्रीम कोर्ट ऑफ इंडिया ने भूटान की सर्वोच्च अदालत के साथ युवा कानूनी पेशेवरों के आदान-प्रदान को सुगम बनाने के लिए एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए हैं। इस पहल से दोनों देशों के बीच न्यायिक सहयोग मजबूत होगा। एमओयू के तहत भूटान से दो लॉ क्लर्क तीन महीने कार्य करेंगे।
सीजेआई सूर्यकांत ने अदालत कक्ष में कार्यवाही शुरू होते ही इसकी जानकारी दी। उन्होंने कहा कि एमओयू के तहत भूटान से दो लॉ क्लर्कों को भारतीय सुप्रीम कोर्ट में तीन महीने की अवधि के लिए नियुक्त किया जाएगा। इन क्लर्कों को भारतीय लॉ क्लर्कों के समान मानदेय मिलेगा और उनके यात्रा खर्च सुप्रीम कोर्ट वहन करेगा। अदालत कक्ष में मौजूद लोगों से भूटानी क्लर्कों का परिचय करते हुए सीजेआई ने उन्हें “युवा और प्रतिभाशाली” बताया। उन्होंने कहा कि ये क्लर्क अपने कार्यकाल के दौरान विभिन्न बेंचों में कार्य करेंगे।
न्यायिक सहयोग और संस्थागत संबंधों को मजबूती
सीजेआई ने बताया कि यह पहल दोनों देशों के बीच न्यायिक सहयोग को बढ़ावा देने और संस्थागत संबंधों को गहरा करने के लिए की गई है। उन्होंने कहा, “हमने भूटान की सुप्रीम कोर्ट के साथ एमओयू किया है, जिसके तहत दो लॉ क्लर्क हमारे मानदेय के आधार पर भुगतान पाएंगे और तीन महीने तक यहां रहेंगे। हम उनके यात्रा खर्च का ध्यान रखेंगे। दोनों विभिन्न अदालतों में कार्य करेंगे और दोनों बहुत प्रतिभाशाली हैं।”
यह कार्यक्रम पिछले साल पूर्व सीजेआई बीआर गवई की भूटान यात्रा के दौरान घोषित प्रस्ताव का हिस्सा है, जब भूटानी लॉ ग्रेजुएट्स के लिए क्लर्कशिप के अवसर की बात हुई थी। भारत और भूटान के बीच निकट संबंधों को देखते हुए यह कदम द्विपक्षीय न्यायिक सहयोग का एक महत्वपूर्ण उदाहरण है।
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