पणजी (गोवा) , 6 जनवरी : रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने गोवा में पहले स्वदेशी प्रदूषण नियंत्रण समुद्री जहाज ‘समुद्र प्रताप’ को भारतीय तटरक्षक बल (इंडियन कोस्ट गार्ड) के बेड़े में शामिल किया। अधिकारियों के अनुसार, इस जहाज का निर्माण गोवा शिपयार्ड लिमिटेड (GSL) में किया गया है। ‘समुद्र प्रताप’ की लंबाई 114.5 मीटर है और इसमें करीब 60 प्रतिशत स्वदेशी उपकरणों का इस्तेमाल किया गया है। यह जहाज 22 नॉटिकल मील प्रति घंटे की गति से चल सकता है और लगभग 6000 नॉटिकल मील की दूरी तय करने में सक्षम है।
प्रदूषण नियंत्रण और समुद्री सुरक्षा में अहम भूमिका
अधिकारियों ने बताया कि यह जहाज समुद्री प्रदूषण नियंत्रण नियमों के क्रियान्वयन, समुद्री कानून लागू करने, खोज एवं बचाव अभियानों के साथ-साथ भारत के विशेष आर्थिक क्षेत्र (EEZ) की सुरक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। रक्षा मंत्री ने गोवा के दक्षिणी क्षेत्र में स्थित गोवा शिपयार्ड लिमिटेड में इस पोत को औपचारिक रूप से कोस्ट गार्ड को सौंपा।
इस अवसर पर गोवा के मुख्यमंत्री प्रमोद सावंत, केंद्रीय रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह और भारतीय तटरक्षक बल के महानिदेशक परमेश शिवमणि भी मौजूद रहे। अधिकारियों ने बताया कि ‘समुद्र प्रताप’ तटरक्षक बल का अब तक का सबसे बड़ा जहाज है।
‘आत्मनिर्भर भारत’ की दिशा में बड़ी उपलब्धि: राजनाथ सिंह
इस मौके पर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा, “यह पोत आत्मनिर्भर भारत की दिशा में एक मजबूत कदम है। रक्षा साजो-सामान निर्माण के क्षेत्र में भारत ने अब ऐसी क्षमता हासिल कर ली है कि वह मैन्युफैक्चरिंग से जुड़ी जटिल चुनौतियों का सफलतापूर्वक सामना कर सकता है।” उन्होंने कहा कि स्वदेशी जहाज निर्माण न केवल राष्ट्रीय सुरक्षा को मजबूत करता है, बल्कि देश की औद्योगिक और तकनीकी ताकत को भी नई पहचान देता है।
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