नई दिल्ली, 12 अप्रैल : केंद्र सरकार ने पेट्रोल, डीजल और जेट फ्यूल को लेकर एक महत्वपूर्ण फैसला लेते हुए निर्यात शुल्क (एक्सपोर्ट ड्यूटी) में बड़ा बदलाव किया है। शनिवार को डीजल पर निर्यात ड्यूटी को दोगुने से भी ज्यादा बढ़ाकर 21.5 रुपये प्रति लीटर से 55.5 रुपये प्रति लीटर कर दिया गया। वहीं जेट फ्यूल पर एक्सपोर्ट चार्ज 29.5 रुपये से बढ़ाकर 42 रुपये प्रति लीटर कर दिया गया है। हालांकि पेट्रोल पर यह ड्यूटी पहले की तरह शून्य ही रखी गई है।
महंगाई से बचाने की कोशिश
माना जा रहा है कि सरकार का यह कदम घरेलू बाजार में कीमतों को नियंत्रित रखने और आम लोगों पर महंगाई का बोझ कम करने के लिए उठाया गया है। इससे देश में पेट्रोल, डीजल और जेट फ्यूल की उपलब्धता सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी। वैश्विक स्तर पर ऊर्जा कीमतें अभी भी अस्थिर बनी हुई हैं। ब्रेंट कच्चे तेल की कीमत लगभग 100 डॉलर प्रति बैरल के आसपास है, जिसके चलते सरकार को यह फैसला लेना पड़ा।
विंडफॉल टैक्स का हिस्सा
यह निर्णय सरकार के विंडफॉल टैक्स ढांचे का हिस्सा है, जिसके तहत रिफाइनरियों के मुनाफे और घरेलू जरूरतों के बीच संतुलन बनाए रखा जाता है। समय-समय पर निर्यात ड्यूटी में बदलाव किया जाता है। इस फैसले का असर तेल कंपनियों के कारोबार पर पड़ सकता है, खासकर उन कंपनियों पर जो डीजल और जेट फ्यूल का निर्यात करती हैं। हालांकि पेट्रोल पर कोई बदलाव नहीं होने से इस क्षेत्र में कारोबार स्थिर रहने की संभावना है। सरकार का उद्देश्य घरेलू ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करना है, जिसके लिए डीजल और जेट फ्यूल पर निर्यात ड्यूटी बढ़ाई गई है।
वैश्विक हालात का असर
ईरान और अमेरिका के बीच युद्धविराम की स्थिति के चलते कच्चे तेल की कीमतें 100 डॉलर से नीचे बनी हुई हैं। आने वाले समय में शांति वार्ताओं के चलते कीमतों में और गिरावट आ सकती है, लेकिन अनिश्चितता अभी भी बरकरार है।
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