नई दिल्ली, 4 अगस्त : अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के टैरिफ वॉर ने कच्चे तेल की दुनिया में एक नई बहस को जन्म दे दिया है। पहले भारत पर रूस से तेल और हथियार न खरीदने का दबाव था, लेकिन भारत ने साफ़ कर दिया है कि वह अपनी ऊर्जा आपूर्ति हमेशा अपने राष्ट्रीय हितों को ध्यान में रखते हुए सुनिश्चित करेगा। इससे डोनाल्ड ट्रंप को बड़ा झटका लगा है। इसके साथ ही भारत के बाद चीन ने भी अमेरिका को बड़ा झटका दिया है। चीन ने भी साफ़ कर दिया है कि वह अपने देश के हितों को ध्यान में रखते हुए ऊर्जा आपूर्ति सुनिश्चित करेगा।
ट्रंप का टैरिफ 7 अगस्त से प्रभावी होगा। पहले यह 1 अगस्त से लागू होने वाला था। लगभग 70 देश ट्रंप के आयात शुल्क का सामना कर रहे हैं। 7 अगस्त से अमेरिका भारतीय वस्तुओं पर 25 प्रतिशत टैरिफ लगाएगा। राष्ट्रपति ट्रंप चाहते हैं कि भारत और चीन रूस से तेल आयात करना बंद कर दें, लेकिन दोनों एशियाई देशों ने अपनी ऊर्जा ज़रूरतों की पूर्ति के लिए रूस को प्राथमिकता दी है।
अब डोनाल्ड ट्रम्प क्या करेंगे?
डोनाल्ड ट्रंप टैरिफ लगाने की धमकी देकर चीन और भारत जैसे देशों पर दबाव बनाकर अपनी बात रखना चाहते हैं। पिछले हफ़्ते उन्होंने अपने सोशल मीडिया पोस्ट के ज़रिए कहा था कि उन्हें जानकारी मिल रही है कि भारत, रूस ने रूस से तेल ख़रीदना बंद कर दिया है, लेकिन अगले ही दिन भारतीय विदेश मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि वह देश की ऊर्जा ज़रूरतों को पूरा करने के लिए प्रतिबद्ध है। भारत ने स्पष्ट किया कि रूस से तेल ख़रीदना बंद नहीं किया गया है।इसके साथ ही भारत के बाद चीन ने भी अमेरिका को जवाब दिया है। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि भारत को मृत अर्थव्यवस्था कहने वाले डोनाल्ड ट्रंप अब क्या कदम उठाते हैं।

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