नई दिल्ली : भारत में वोटर आईडी कार्ड को आधार कार्ड से जोडऩे की प्रक्रिया जल्द ही शुरू हो सकती है। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने इस संबंध में केंद्रीय गृह मंत्रालय, विधि एवं न्याय मंत्रालय और भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (यूआईडीएआई) के साथ एक उच्च स्तरीय बैठक का आयोजन किया है, जो अगले सप्ताह होने वाली है।
इस बैठक में इलेक्ट्रॉनिक मतदाता पहचान पत्र (ईपीआईसी) के लिए अलग-अलग नंबरों की व्यवस्था और इसे आधार कार्ड से जोडऩे के विषय पर चर्चा की जाएगी।
तृणमूल कांग्रेस की आपत्ती के बाद लिया फैसला
यह बैठक ऐसे समय में हो रही है जब इस मुद्दे पर राजनीतिक बहस तेज हो गई है, विशेषकर पश्चिम बंगाल में मतदाता पहचान पत्र के संदर्भ में। तृणमूल कांग्रेस द्वारा डुप्लिकेट प्रविष्टियों के संबंध में उठाई गई चिंताओं के बाद, चुनाव आयोग ने अगले तीन महीनों में डुप्लिकेट मतदाता प्रविष्टियों को हटाने की योजना की घोषणा की है।
यह कदम मतदाता पहचान की प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और प्रभावी बनाने के लिए उठाया गया है।
फर्जी वोटर रोकने की कवायद तेज
चुनाव आयोग के सूत्रों के अनुसार, श्री कुमार के साथ केंद्रीय गृह सचिव और विधि एवं न्याय मंत्रालय के विधायी विभाग के अधिकारी भी बैठक में शामिल होंगे। इस बैठक का उद्देश्य न केवल वोटर आईडी और आधार कार्ड के बीच लिंक स्थापित करना है, बल्कि यह सुनिश्चित करना भी है कि चुनावी प्रक्रिया में किसी भी प्रकार की अनियमितता को रोका जा सके।
इस प्रकार, यह कदम चुनावी प्रणाली की विश्वसनीयता को बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

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