नई दिल्ली, 10 नवम्बर : भारत के मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) बी.आर. गवई ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) के दुरुपयोग पर चिंता व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि इस तरह के उपकरणों का इस्तेमाल न्यायपालिका के खिलाफ भी किया जा रहा है।
मुख्य न्यायाधीश गवई ने कहा कि उन्होंने एआई द्वारा बनाई गई अपनी फ़र्ज़ी तस्वीरें देखी हैं। उन्होंने कहा, “हाँ, मैंने भी कई तस्वीरें देखी हैं।” जनरेटिव एआई (जेनए) को विनियमित करने के लिए दिशानिर्देश जारी करने की मांग को लेकर सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दायर की गई है।
याचिका के अनुसार,
जनरल एआई एक ब्लैक बॉक्स की तरह काम कर रहा है। इसके कारण कानूनों और आरटीआई से जुड़े कई फर्जी मामले सामने आए हैं। इससे पता चलता है कि जनरल एआई एक ऐसे कानून पर काम कर रहा है जो अस्तित्व में ही नहीं है। इस तरह की हरकतें अनुच्छेद 14 (समानता का अधिकार) का सीधा उल्लंघन हैं।
मांग क्या है?
याचिकाकर्ता का कहना है कि न्यायिक व्यवस्था में भी एआई का इस्तेमाल हो रहा है। हालाँकि, न्यायिक व्यवस्था को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि इस आरटीआई से किसी को कोई नुकसान न हो और डेटा पूरी तरह पारदर्शी रहे।

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