August 20, 2026

नशा विरोधी मामलों में सज़ा दिलाने में पंजाब का पुलिसिंग मॉडल सबसे आगे

नशा विरोधी मामलों में सज़ा दिलाने में ...

चंडीगढ़, 4 अप्रैल : पंजाब में ‘युद्ध नशों के विरुद्ध’ अभियान अब केवल नशा तस्करों की गिरफ्तारी तक सीमित नहीं रहा, बल्कि अदालतों से उन्हें सख्त सज़ा दिलाने की दिशा में भी उल्लेखनीय सफलता हासिल कर रहा है। मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के नेतृत्व में राज्य सरकार के समर्थन से एजेंसियां अब मजबूत कानूनी केस तैयार करने पर विशेष ध्यान दे रही हैं, ताकि तस्करों को पकड़ने के साथ-साथ उन्हें सज़ा भी सुनिश्चित हो सके।

पंजाब में सज़ा दर देश में सबसे अधिक

पुलिस अधिकारियों के अनुसार, एनडीपीएस एक्ट के तहत मामलों में पंजाब की सज़ा दर 88% तक पहुंच गई है, जो देश में सबसे अधिक है।

  • 2022: 4812 मामलों में से 3870 में सज़ा (80%)
  • 2023: 6976 में से 5635 सज़ा (81%)
  • 2024: 7281 में से 6219 सज़ा (85%)
  • 2025: 7373 में से 6488 सज़ा (88%)
  • 2026 (अब तक): 1831 में से 1634 सज़ा (89%)

यह लगातार बढ़ती दर राज्य की रणनीतिक और व्यवस्थित पुलिसिंग का परिणाम मानी जा रही है।

वैज्ञानिक जांच और मजबूत केस तैयार करने पर जोर

पंजाब पुलिस ने पारंपरिक जांच के बजाय आधुनिक और वैज्ञानिक तरीकों को अपनाया है। इसमें शामिल हैं मुकदमे की अगुवाई वाली जांच, वैज्ञानिक तरीके से सबूत जुटाना, नशा नेटवर्क की वित्तीय ट्रैकिंग, तकनीक आधारित खुफिया जानकारी। अधिकारियों का कहना है कि अब हर केस इस तरह तैयार किया जाता है कि अदालत में मजबूत पैरवी हो सके और कोई आरोपी तकनीकी कमी का फायदा न उठा सके।

इसके अलावा, राजीव गांधी नेशनल यूनिवर्सिटी ऑफ लॉ, पटियाला के साथ साझेदारी कर जांच अधिकारियों को 6 दिन की अनिवार्य सर्टिफिकेशन ट्रेनिंग दी जा रही है। अब तक 400 से अधिक अधिकारी प्रशिक्षण ले चुके हैं।

तकनीक और जनता की भागीदारी से बढ़ी प्रभावशीलता

नशा तस्करी पर अंकुश लगाने के लिए पुलिस ने तकनीक और आम लोगों की भागीदारी को भी जोड़ा है। डिजिटल प्लेटफॉर्म और गुप्त सूचना प्रणाली, नागरिकों को सूचना देने के लिए प्रोत्साहन, संगठित नेटवर्क की पहचान और कार्रवाई। अधिकारियों का कहना है कि जब तस्करों की आर्थिक ताकत टूटती है, तो उनका नेटवर्क खुद कमजोर हो जाता है और अदालत में केस भी मजबूत होता है।