नई दिल्ली, 7 अगस्त : सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को इलाहाबाद उच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति यशवंत वर्मा की उस याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें उन्होंने तीन सदस्यीय आंतरिक जांच समिति की रिपोर्ट और पूर्व मुख्य न्यायाधीश जस्टिस संजीव खन्ना द्वारा उनके खिलाफ महाभियोग की सिफारिश को चुनौती दी थी। सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट रूप से कहा कि जस्टिस वर्मा के आचरण से विश्वास उत्पन्न नहीं होता, और ऐसे में उनकी याचिका पर विचार करने का कोई औचित्य नहीं बनता।
गौरतलब है कि जांच समिति की रिपोर्ट में न्यायमूर्ति वर्मा के खिलाफ गंभीर टिप्पणियाँ की गई थीं, जिसके आधार पर तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश ने उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई और महाभियोग की प्रक्रिया शुरू करने की अनुशंसा की थी।
यह मामला न्यायपालिका में पारदर्शिता और जवाबदेही के दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। सुप्रीम कोर्ट के इस निर्णय से यह संकेत गया है कि न्यायिक पदों पर आसीन व्यक्तियों के लिए आचरण की उच्चतम मानकों का पालन करना अनिवार्य है।
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