नई दिल्ली – प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने गुजरात में एक जनसभा को संबोधित करते हुए कहा कि कश्मीर में आतंकवादियों से 1947 में ही प्रभावी तरीके से निपटा जाना चाहिए था, जब विभाजन के बाद पहला आतंकवादी हमला हुआ था और आज भारत जिस स्थिति का सामना कर रहा है, वह उसी आतंकवाद का विकृत रूप है, जिसने दशकों से देश को त्रस्त किया हुआ है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत के प्रथम गृह मंत्री सरदार वल्लभभाई पटेल ने तर्क दिया था कि 1947 में पाकिस्तान के खिलाफ सैन्य आक्रमण पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर को वापस हासिल किए बिना आगे नहीं बढ़ना चाहिए था, लेकिन तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने उनकी सलाह को नजरअंदाज कर दिया।
प्रधानमंत्री ने कहा, “सरदार पटेल चाहते थे कि सेना तब तक न रुके जब तक पीओके वापस न ले लिया जाए, लेकिन सरदार साहब की बात नहीं मानी गई। इन मुजाहिद्दीनों द्वारा किया जा रहा खून-खराबा पिछले 75 वर्षों से जारी है। पहलगाम में जो हुआ, वह इसी का विकृत रूप था। भारतीय सेना ने हर बार पाकिस्तान को हराया है। पाकिस्तान को यह एहसास हो गया है कि वह भारत से नहीं जीत सकता।”

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