चंडीगढ़, 11 नवम्बर : पंजाब विश्वविद्यालय में लंबे समय से लंबित सीनेट चुनावों का मामला अब पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय पहुँच गया है। छात्रों के विरोध प्रदर्शन के बीच, हरप्रीत सिंह दुआ ने अपने वकील आर. कार्तिकेय और आर. आकांक्षा के माध्यम से विश्वविद्यालय प्रशासन को चुनाव कार्यक्रम तुरंत घोषित करने का निर्देश देने की माँग की है। इसके खिलाफ एक याचिका दायर की गई है।
नई सीनेट का कार्यकाल 1 नवंबर से शुरू होना था
याचिका में आरोप लगाया गया है कि विश्वविद्यालय के भीतर कुछ हितधारक विश्वविद्यालय के लोकतंत्र को बाधित कर रहे हैं और विरासत के ढांचे को कमजोर करने के लिए जानबूझकर चुनाव प्रक्रिया में देरी कर रहे हैं। याचिकाकर्ता ने कहा कि चुनाव प्रक्रिया का सामना करने के डर से कुछ व्यक्तियों ने प्रशासन से संपर्क करके प्रतिनिधियों की भागीदारी की परंपरा को बाधित करने का प्रयास किया है। याचिका में यह भी कहा गया है कि नई सीनेट का कार्यकाल 1 नवंबर, 2024 से शुरू होना था, लेकिन अभी तक चुनावों के संबंध में अधिसूचना जारी नहीं की गई है।
अदालत ने पहले कुलपति को 27 मार्च तक जवाब देने का आखिरी मौका दिया था, लेकिन सात महीने बाद भी कोई जवाब नहीं मिला। याचिका में 28 अक्टूबर को जारी एक अधिसूचना का हवाला दिया गया है, जिसमें आरोप लगाया गया है कि इसमें सीनेट का आकार कम करने और कुछ प्रमुख समूहों को उनके अधिकारों से वंचित करने की कोशिश की गई है।
यह भी आरोप लगाया गया है कि नामांकन के ज़रिए विश्वविद्यालय सिंडिकेट को अधीनस्थ बना दिया गया है। जिससे लोकतांत्रिक मूल्य कमज़ोर हुए हैं। मामले की अगली सुनवाई अब पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय में 16 दिसंबर को होगी।
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