April 15, 2026

ज़मानती मामले में मोहाली के दंपत्ति की गिरफ्तारी पर हाई कोर्ट सख्त

ज़मानती मामले में मोहाली के दंपत्ति...

चंडीगढ़, 9 अप्रैल: पंजाब में पुलिस कार्रवाई के तरीके पर गंभीर सवाल उठाते हुए पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट ने एक मामले में कड़ा रुख अपनाया है। अदालत ने मोहाली के एक दंपत्ति की ज़मानती मामले में गिरफ्तारी और उनके दो छोटे बच्चों को थाने ले जाने की घटना को गंभीरता से लेते हुए राज्य सरकार को संबंधित पुलिस अधिकारियों के खिलाफ उचित कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं।

ज़मानती मामले में गिरफ्तारी पर उठे सवाल

यह मामला मोनिका छाबड़ा द्वारा दायर याचिका पर सामने आया। याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता मनीष गिरी ने अदालत को बताया कि 20 नवंबर 2025 को दर्ज एफआईआर में लगाए गए सभी आरोप ज़मानती थे, फिर भी पुलिस ने सुबह-सुबह घर में घुसकर दंपत्ति को गिरफ्तार कर लिया।

मामले का सबसे चिंताजनक पहलू यह रहा कि पुलिस दंपत्ति के दो छोटे बच्चों (लगभग 1.5 वर्ष और 5 वर्ष) को भी अपने साथ थाने ले गई, जबकि उन पर कोई आरोप नहीं था। अदालत ने इस कार्रवाई पर कड़ी आपत्ति जताई और इसे गंभीर लापरवाही माना।

मैजिस्ट्रेट के सामने हुआ खुलासा

जब दंपत्ति को मैजिस्ट्रेट के समक्ष पेश किया गया, तो यह स्पष्ट हो गया कि सभी धाराएं ज़मानती थीं। इसके बाद उन्हें उसी दिन रिहा कर दिया गया। इस पूरे घटनाक्रम ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

याचिका में कहा गया कि यह कार्रवाई सुप्रीम कोर्ट के उन दिशा-निर्देशों का उल्लंघन है, जिनमें कहा गया है कि गिरफ्तारी नियम नहीं बल्कि अपवाद होनी चाहिए, खासकर उन मामलों में जहां सज़ा 7 साल तक हो सकती है।

पिटीशन में यह भी आरोप लगाया गया कि पुलिस की कार्रवाई अनुच्छेद 14 और अनुच्छेद 21 के तहत दिए गए समानता और व्यक्तिगत स्वतंत्रता के अधिकारों का उल्लंघन है।

हाई कोर्ट ने दिए जांच और कार्रवाई के निर्देश

अदालत को यह भी बताया गया कि इस मामले में वरिष्ठ अधिकारियों को शिकायत दी गई थी, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। इस पर सख्ती दिखाते हुए हाई कोर्ट ने पंजाब सरकार को संबंधित अधिकारियों की भूमिका की जांच कर उचित कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं।

मामले की अगली सुनवाई 10 अप्रैल 2026 को निर्धारित की गई है, जिसमें अदालत आगे की प्रगति की समीक्षा करेगी।