चंडीगढ़, 12 फरवरी : देश के अन्न भंडार में सबसे बड़ा योगदान देने वाले पंजाब और हरियाणा के किसान कृषि कर्ज के मामले में क्रमशः तीसरे और चौथे स्थान पर हैं। पंजाब में प्रति किसान परिवार पर औसत कर्ज 2.03 लाख रुपये है, जबकि हरियाणा में यह आंकड़ा 1.83 लाख रुपये तक पहुंच चुका है।
पंजाब और हरियाणा तीसरे–चौथे स्थान पर
कृषि कर्ज के मामले में आंध्र प्रदेश (2.45 लाख रुपये) और केरल (2.42 लाख रुपये) पहले और दूसरे स्थान पर हैं। लोकसभा में सांसद के. सरेन खेर्वाल द्वारा पूछे गए सवाल के जवाब में केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने बताया कि देश में प्रति किसान परिवार औसत बकाया कर्ज 74,121 रुपये है।
पूर्वोत्तर राज्यों में सबसे कम कर्ज
सबसे कम कर्ज नागालैंड में है, जहां प्रति किसान परिवार केवल 1,750 रुपये का कर्ज है। इसके बाद मेघालय (2,237 रुपये) और अरुणाचल प्रदेश (3,581 रुपये) का स्थान है। राजस्थान में प्रति किसान परिवार 1.13 लाख रुपये, हिमाचल प्रदेश में 85,825 रुपये और जम्मू-कश्मीर में 30,435 रुपये कर्ज दर्ज किया गया है। 1 लाख रुपये से अधिक कर्ज वाले राज्यों में तमिलनाडु (1.06 लाख रुपये), कर्नाटक (1.26 लाख रुपये) और तेलंगाना (1.52 लाख रुपये) शामिल हैं।
हिंदी पट्टी के राज्यों में मध्यम स्तर का कर्ज
हिंदी पट्टी के राज्यों में बिहार (23,534 रुपये), छत्तीसगढ़ (21,443 रुपये), झारखंड (8,415 रुपये), मध्य प्रदेश (74,420 रुपये), उत्तराखंड (48,338 रुपये) और उत्तर प्रदेश (51,107 रुपये) में कर्ज का बोझ मध्यम स्तर का है।
विशेषज्ञों के अनुसार किसानों में लगातार बढ़ती कर्ज निर्भरता के पीछे कई कारण हैं, जिनमें कृषि लागत में वृद्धि, सीमित आय, अनिश्चित मौसम विशेषकर मानसून की अनिश्चितता, फसलों के भुगतान में देरी, छोटे जोत आकार, सामाजिक आयोजनों पर अधिक खर्च और उच्च अशिक्षा दर प्रमुख हैं। कृषि क्षेत्र की स्थिरता और किसानों की आर्थिक स्थिति सुधारने के लिए प्रभावी नीतियों और समय पर समर्थन की आवश्यकता महसूस की जा रही है।
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