पटियाला, 2 फरवरी : महाराजा हीरा सिंह की छठी पीढ़ी के वंशज कुंवर अभि उदय प्रताप सिंह का पारंपरिक दस्तारबंदी समारोह सोमवार को नाभा स्थित ऐतिहासिक हीरा महल में श्रद्धा, अनुशासन और शाही गरिमा के साथ संपन्न हुआ। यह समारोह सिख रीति-रिवाजों और शाही परंपराओं के अनुसार आयोजित किया गया। दस्तारबंदी समारोह की शुरुआत सिख परंपराओं के अनुसार अरदास (प्रार्थना) से हुई। इसके पश्चात कुंवर अभि उदय प्रताप सिंह को विधिवत रूप से दस्तार भेंट की गई।
सिख धर्म में दस्तारबंदी न केवल धार्मिक अनुष्ठान है, बल्कि यह जिम्मेदारी, मूल्यों और पारिवारिक व सामाजिक विरासत की निरंतरता का प्रतीक भी मानी जाती है।
एसजीपीसी अध्यक्ष हरजिंदर सिंह धामी रहे विशेष अतिथि
शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के अध्यक्ष एडवोकेट हरजिंदर सिंह धामी ने विशेष अतिथि के रूप में समारोह में शिरकत की और कुंवर अभि उदय प्रताप सिंह को पगड़ी भेंट की। इस अवसर पर उन्होंने रानी प्रीति सिंह सहित शाही परिवार के अन्य सदस्यों से भी मुलाकात की।
एडवोकेट धामी ने दस्तारबंदी की परंपरा को सिख इतिहास और मूल्यों से जोड़ते हुए कहा कि यह परंपरा आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत है और युवाओं को अपनी संस्कृति से जोड़े रखने का माध्यम है।
बाबा गुरिंदर सिंह ढिल्लों की मौजूदगी से बढ़ी आध्यात्मिक गरिमा
ब्यास डेरे के प्रमुख बाबा गुरिंदर सिंह ढिल्लों ने भी दस्तारबंदी समारोह की शोभा बढ़ाई। कार्यक्रम से पूर्व उन्होंने आश्रम में अपने अनुयायियों को आशीर्वाद दिया और बाद में महल पहुंचकर शाही परिवार को आशीर्वाद प्रदान किया। उनकी उपस्थिति से समारोह की आध्यात्मिक पवित्रता और गरिमा में वृद्धि हुई। शाही परिवार ने बताया कि यह दस्तारबंदी समारोह अत्यंत सादगी, अनुशासन और श्रद्धा के साथ संपन्न किया गया।
आयोजन में सिख परंपराओं और शाही मर्यादाओं का विशेष ध्यान रखा गया। परिवार के अनुसार यह समारोह केवल एक धार्मिक रस्म नहीं, बल्कि नई पीढ़ी को अपने इतिहास, संस्कृति और जिम्मेदारियों से जोड़ने का सशक्त माध्यम है।
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