February 5, 2026

अमेरिका ने भारत को किया अलर्ट, चीन कभी भी कर सकता है हमला

अमेरिका ने भारत को किया अलर्ट...

वाशिंगटन, 5 फरवरी : जब पूरी दुनिया की नजरें इस समय ताइवान पर टिकी हुई हैं, उसी बीच अमेरिका के एक पूर्व मरीन इंटेलिजेंस अधिकारी ग्रांट न्यूशम ने भारत को लेकर गंभीर चेतावनी दी है। न्यूशम का कहना है कि ताइवान के मुद्दे की आड़ में चीन किसी अन्य देश, खासतौर पर भारत पर अचानक हमला कर सकता है। उन्होंने भारत को चीन के इरादों पर भरोसा न करने और हर समय सतर्क रहने की सलाह दी है।

2049 तक महाशक्ति बनने की चीनी रणनीति

न्यूशम ने पेंटागन की एक हालिया रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि चीन 2049 तक खुद को एक वैश्विक महाशक्ति के रूप में स्थापित करना चाहता है। उनके मुताबिक चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग पीएलए (पीपुल्स लिबरेशन आर्मी) में हाल में किए गए बदलावों और सुधारों को परखने के लिए किसी मोर्चे पर सैन्य कार्रवाई का सहारा ले सकते हैं।

ग्रांट न्यूशम ने कहा कि हमेशा उन जगहों पर नजर रखनी चाहिए, जहां दुनिया की नजरें नहीं होतीं। जब पूरा वैश्विक ध्यान ताइवान पर केंद्रित हो, तब चीन भारत, दक्षिण कोरिया, दक्षिणी जापान या फिलीपींस जैसे क्षेत्रों में अपनी सैन्य ताकत का प्रदर्शन कर सकता है। उन्होंने दावा किया कि चीन की पूरी पीआर रणनीति धोखे पर आधारित है।

भारत चीन की प्राथमिक सूची में सबसे ऊपर
न्यूशम के अनुसार, चीन की संभावित ‘सरप्राइज एक्शन’ सूची में भारत सबसे ऊपर है। ताइवान के नाम पर दुनिया को उलझाकर चीन भारत के खिलाफ कोई चौंकाने वाली कार्रवाई कर सकता है।

गलवान की मिसाल, पीएलए को कम न आंकें

अक्सर यह कहा जाता है कि चीनी सेना दशकों से किसी बड़े युद्ध में शामिल नहीं हुई और वह ‘अनटेस्टेड’ है, लेकिन न्यूशम ने इस सोच को खारिज किया। उन्होंने लद्दाख के गलवान घाटी संघर्ष का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां पीएलए और भारतीय सेना के बीच आमने-सामने की हिंसक झड़प हुई थी, जिसमें चीन को भारी नुकसान उठाना पड़ा था। उन्होंने कहा कि भले ही चीन ‘शांति’ की बात करता हो, लेकिन उसकी सेना लगातार कठोर प्रशिक्षण में लगी हुई है।

भारत-अमेरिका संबंधों पर भी दिया संकेत

भारत और अमेरिका के बीच व्यापार समझौते पर बातचीत पूरी होने की घोषणा के एक दिन बाद न्यूशम ने भारत में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर की भूमिका को भी अहम बताया। उन्होंने कहा कि गोर राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के काफी करीबी रहे हैं और उनकी भारत में नियुक्ति भारत-अमेरिका संबंधों के लिए एक बड़ा संकेत है।

यह चेतावनी ऐसे समय आई है, जब एशिया में भू-राजनीतिक तनाव लगातार बढ़ता जा रहा है और भारत की रणनीतिक सतर्कता और भी महत्वपूर्ण हो गई है।

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