नई दिल्ली, 13 अगस्त : अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की चर्चा पूरी दुनिया में हो रही है। वह भारत समेत कई देशों पर भारी टैरिफ लगा रहे हैं, वहीं देश के भीतर भी कई जगहों पर टैक्स में बदलाव समेत फंडिंग में कटौती कर रहे हैं। इसी क्रम में, डोनाल्ड ट्रंप ने अमेरिकी विश्वविद्यालयों के लिए संघीय फंडिंग में भी बड़ी कटौती का प्रस्ताव रखा है, जिसका हार्वर्ड, कोलंबिया और जॉन्स हॉपकिन्स जैसे देश के प्रतिष्ठित विश्वविद्यालयों पर बड़ा असर पड़ सकता है।
किन यूनिवर्सिटीयों को होगा नुकसान
हार्वर्ड विश्वविद्यालय, कोलंबिया विश्वविद्यालय, जॉन्स हॉपकिन्स विश्वविद्यालय, कैलिफ़ोर्निया विश्वविद्यालय (सैन डिएगो, सैन फ्रांसिस्को), मिशिगन विश्वविद्यालय, वाशिंगटन विश्वविद्यालय, कैलिफ़ोर्निया विश्वविद्यालय (एलए), येल, पिट्सबर्ग विश्वविद्यालय उन विश्वविद्यालयों में शामिल हैं जिन पर ट्रम्प की फंडिंग कटौती का सबसे ज़्यादा असर पड़ने की संभावना है। इसके अलावा, कई अन्य विश्वविद्यालय भी प्रभावित होंगे।
आंकड़ों के अनुसार, इन शीर्ष विश्वविद्यालयों को फंडिंग में कटौती के कारण 1 अरब डॉलर तक का नुकसान हो सकता है। ट्रम्प प्रशासन द्वारा प्रस्तावित कटौती के तहत, अमेरिकी विश्वविद्यालयों को संघीय फंडिंग में कुल 3.7 अरब डॉलर तक का नुकसान हो सकता है। विश्वविद्यालय के अनुसार, प्रत्येक विश्वविद्यालय को कितना नुकसान होगा जॉन्स हॉपकिन्स, मिशिगन और कैलिफोर्निया (सैन डिएगो और सैन फ्रांसिस्को) जैसे विश्वविद्यालयों के बजट में संघीय वित्तपोषण का सबसे बड़ा हिस्सा है। इन संस्थानों का 20% या उससे अधिक वित्तपोषण संघीय सरकार से आता है।

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