वॉशिंगटन, 21 जनवरी : अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दूसरे कार्यकाल की पहली वर्षगांठ के मौके पर उनकी सख़्त इमिग्रेशन दमन नीतियों के खिलाफ अमेरिका भर में बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन हुए। मंगलवार को हज़ारों मज़दूरों, छात्रों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने शहरों, विश्वविद्यालय परिसरों और छोटे कस्बों में मार्च निकाले। ये विरोध प्रदर्शन खास तौर पर मिनियापोलिस में संघीय एजेंटों द्वारा अमेरिकी नागरिक रेनी निकोल गुड की गोली मारकर हत्या किए जाने की घटना के बाद तेज़ हो गए।
7 जनवरी 2026 को ICE एजेंट जोनाथन रॉस ने 37 वर्षीय मां रेनी गुड को उनकी कार में गोली मार दी थी। संघीय अधिकारियों का दावा है कि गुड ने एजेंट को कार से कुचलने की कोशिश की, जबकि चश्मदीदों, मिनियापोलिस के मेयर जैकब फ्रे और गवर्नर टिम वाल्ज़ ने इसे “लापरवाही” और “अनावश्यक बल प्रयोग” बताया है।
‘ऑपरेशन मेट्रो सर्ज’ के तहत भारी तैनाती
घटना के बाद मिनियापोलिस में ‘ऑपरेशन मेट्रो सर्ज’ के तहत 2,000 से अधिक संघीय एजेंट तैनात किए गए। इसके चलते हज़ारों गिरफ्तारियां हुईं और कई जगहों पर विरोध प्रदर्शन हिंसक हो गए। राष्ट्रपति ट्रंप ने रेनी गुड को “घरेलू आतंकवादी” करार दिया और हालात बिगड़ने पर ‘इंसरेक्शन एक्ट’ लागू करने की धमकी भी दी है, जिससे राजनीतिक और सामाजिक तनाव और बढ़ गया है।
देशभर में फैला विरोध का दायरा
वॉशिंगटन डी.सी. से लेकर नॉर्थ कैरोलिना के छोटे शहर ऐशविल तक सैकड़ों प्रदर्शनकारी सड़कों पर उतरे। सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में लोग “ना ICE, ना KKK, ना फासीवादी अमेरिका” जैसे नारे लगाते दिखे। न्यूयॉर्क, लॉस एंजेलिस, शिकागो और पोर्टलैंड समेत कई शहरों में छात्रों ने कैंपस वॉकआउट किए, जहां पुलिस से झड़पों की भी खबरें आईं।
ट्रंप प्रशासन का बचाव और जनमत में विभाजन
ट्रंप प्रशासन का कहना है कि उन्हें मतदाताओं से “अवैध प्रवासियों को देश से बाहर करने का जनादेश” मिला है। हालिया सर्वेक्षणों (रॉयटर्स/इप्सोस और वॉशिंगटन पोस्ट) के अनुसार, अधिकांश अमेरिकी ICE द्वारा बल प्रयोग के खिलाफ हैं, जबकि रिपब्लिकन मतदाताओं में भी इस मुद्दे पर मतभेद सामने आए हैं। प्रशासन ने 75 देशों से इमिग्रेंट वीज़ा प्रोसेसिंग रोक दी है और ICE का बजट बढ़ाकर 28.7 अरब डॉलर कर दिया गया है, जिससे सरकार की सख़्त इमिग्रेशन नीति और स्पष्ट होती है।
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