नई दिल्ली, 6 जनवरी : ‘ऑपरेशन सिंदूर’ से संबंधित अमेरिकी दस्तावेजों में एक और बड़ा खुलासा हुआ है, जिसने एक बार फिर दुनिया के सामने पाकिस्तान का असली चेहरा उजागर कर दिया है। अमेरिकी सरकारी दस्तावेजों के अनुसार, जम्मू-कश्मीर के पहलगाम हमले से लेकर ‘ऑपरेशन सिंदूर’ की शुरुआत और भारत-पाकिस्तान के बीच चार दिनों तक चले तनाव के दौरान, पाकिस्तान ने अमेरिका पर दबाव बनाने में कोई कसर नहीं छोड़ी।
पाकिस्तानी राजनयिकों और रक्षा अधिकारियों ने अमेरिका में 50 से अधिक बैठकों का अनुरोध किया था। ये बैठकें वरिष्ठ अमेरिकी अधिकारियों, सांसदों और प्रभावशाली मीडिया संस्थानों के साथ आयोजित करने का प्रस्ताव था।
60 से अधिक बैठकें आयोजित की गईं
अमेरिकी विदेशी एजेंट पंजीकरण अधिनियम (एफएआरए) के रिकॉर्ड से पता चलता है कि अमेरिका में पाकिस्तानी उच्चायुक्त ने ईमेल, फोन कॉल और व्यक्तिगत मुलाकातों के माध्यम से 60 से अधिक बैठकें की थीं। इन बैठकों का उद्देश्य भारत के खिलाफ अमेरिका पर दबाव बनाना था। ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के प्रभाव से जूझ रहा पाकिस्तान, भारत की कार्रवाई रोकने के लिए अमेरिका से गुहार लगा रहा था।
ट्रंप को खुश करने के लिए कोई कसर नहीं छोड़ी गई।
रिपोर्ट के अनुसार, पाकिस्तान ने ‘जैवलिन एडवाइजर्स’ के माध्यम से काम करने वाली ‘सेडन लॉ एलएलपी’ के साथ एक समझौता किया था। इसके कुछ हफ्तों बाद, ट्रंप ने पाकिस्तानी सेना प्रमुख आसिम मुनीर का व्हाइट हाउस में स्वागत किया। ट्रंप को खुश करने के लिए, पाकिस्तान ने अमेरिकी राष्ट्रपति से उन्हें नोबेल शांति पुरस्कार देने की भी अपील की। इसके साथ ही, पाकिस्तान ने ट्रंप को व्यापार से संबंधित कई प्रलोभन भी दिए थे।

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