शिमला, 17 जुलाई 2026: हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने शिमला स्थित ऐतिहासिक धरोहर भारतीय उच्च अध्ययन संस्थान (IIAS), जिसे पहले ‘वाइसरीगल लॉज’ या ‘राष्ट्रपति निवास’ के नाम से जाना जाता था, की बदहाली पर गहरी नाराजगी जताई है।
मुख्य न्यायाधीश जी.एस. संधावालिया और न्यायमूर्ति बिपिन सी. नेगी की खंडपीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए कहा कि यह इमारत तत्कालीन राष्ट्रपति डॉ. एस. राधाकृष्णन द्वारा शैक्षणिक कार्यों के लिए सौंपी गई थी, लेकिन केंद्रीय शिक्षा विभाग ने इसके रखरखाव में पूरी तरह लापरवाही बरती है।
कोर्ट के आदेश पर जिला कानूनी सेवा प्राधिकरण शिमला के सचिव द्वारा किए गए निरीक्षण में इमारत की बदहाली के कई सबूत मिले। मुख्य सार्वजनिक प्रवेश द्वार का रखरखाव बेहद खराब है। इमारत की दीवारों में कई जगह गंभीर दरारें हैं। छतें, सीढ़ियां, रेलिंग और फर्श पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो चुके हैं।
अदालत को बताया गया कि 1888 में बनी इस इमारत की आज तक कोई बड़ी मुरम्मत नहीं की गई। वर्ष 2019 में केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय ने 66.38 करोड़ रुपये के संशोधित बजट को मंजूरी दी थी। अगस्त 2020 में रसोईघर (किचन विंग) के जीर्णोद्धार का काम शुरू हुआ, जिसमें अब तक 6.49 करोड़ रुपये खर्च हो चुके हैं। लेकिन अगस्त 2025 तक केवल 68 प्रतिशत काम ही पूरा हो पाया है।
हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार को सख्त निर्देश देते हुए सीपीडब्ल्यूडी, भारतीय उच्च अध्ययन संस्थान और भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) की ओर से अलग-अलग विस्तृत हलफनामा दायर करने को कहा है।
यह भी देखें: हिमाचल हाईकोर्ट का सख्त फैसला, आर्किटेक्ट मनुज शारदिया का लाइसेंस अस्थायी रूप से सस्पेंड

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