फरीदाबाद, 6 जनवरी : डबुआ कॉलोनी में रहने वाली एक महिला पिछले 20 सालों से अपनी पीठ के निचले हिस्से में गोली लिए घूम रही थी। उसे कोई दर्द महसूस नहीं होता था। कुछ दिन पहले, महिला की पीठ के निचले हिस्से में एक फोड़ा हो गया। धीरे-धीरे घाव में संक्रमण होने लगा। पास में रहने वाली एक बुजुर्ग महिला की सलाह पर फोड़े पर लेप लगाया गया। लेप लगाने के बाद, फोड़े के अंदर एक नुकीली चीज दिखाई दी, जिसे महिला ने खुद निकाला। इसे देखकर सभी लोग चौंक गए क्योंकि वह एक गोली थी।
मुझे 12 साल की उम्र में पीठ में दर्द होता था
डबुआ कॉलोनी में रहने वाली कविता के चार बच्चे हैं। उनके पति ड्राइवर का काम करते हैं। कविता के अनुसार, उन्हें कभी पता ही नहीं चला कि उनकी पीठ के निचले हिस्से में गोली लगी है। मानेसर में रहने वाली कविता बताती हैं कि जब वह 12 साल की थीं, तब स्कूल की परीक्षा देते समय उनकी पीठ के निचले हिस्से में तेज दर्द हुआ। दर्द कम होने पर उन्होंने देखा कि उनकी पीठ के निचले हिस्से से खून निकल रहा है। उन्हें लगा कि किसी ने उन्हें पत्थर मारा है।
स्कूल के पास ही एक सेना प्रशिक्षण शिविर था
शिक्षक ने उन्हें घर जाकर आराम करने की सलाह दी। घर लौटने पर उन्होंने डॉक्टर से परामर्श लिया और दवाइयाँ खाईं। घाव धीरे-धीरे ठीक हो गया। कविता के अनुसार, उनके विद्यालय के पास एक सेना प्रशिक्षण शिविर था। गोली संभवतः वहीं से आई होगी। पिछले 20 वर्षों में उन्हें कोई समस्या नहीं हुई है।
कविता के पति प्रदीप के अनुसार, शादी के बाद उन्हें कोई परेशानी नहीं हुई। बादशाह खान सिविल अस्पताल के न्यूरोसर्जन डॉ. उपेंद्र भारद्वाज ने बताया कि ऐसा इसलिए संभव है क्योंकि गोली एक धातु की वस्तु है। बंदूक से चलाई गई गोली में कोई जहर नहीं होता। यह सिर्फ गर्म लोहे का एक टुकड़ा होता है। कभी-कभी गोली शरीर के किसी हड्डी वाले हिस्से पर रुक जाती है। ऐसा तब होता है जब गोली की गति धीमी हो जाती है।

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