नई दिल्ली, 8 जनवरी : बांग्लादेश पुलिस ने अल्पसंख्यक हिंदू कपड़ा मजदूर दीपू चंद्र दास की बेरहमी से पीट-पीटकर की गई हत्या के मुख्य आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है। इस घटना की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तीखी निंदा हुई थी, जिसके बाद बांग्लादेश में धार्मिक अल्पसंख्यकों के खिलाफ बढ़ती हिंसा को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए थे।
अधिकारियों के अनुसार, गिरफ्तार आरोपी की पहचान यासीन आराफात के रूप में हुई है, जो एक पूर्व शिक्षक बताया जा रहा है। पुलिस का कहना है कि आराफात ने न सिर्फ इस हमले की योजना बनाई, बल्कि उसे अंजाम देने में भी अहम भूमिका निभाई।
क्या हुआ था दीपू चंद्र दास के साथ?
यह जघन्य हत्या 18 दिसंबर को बांग्लादेश के मैमनसिंह जिले में हुई थी। आरोप है कि 27 वर्षीय दीपू चंद्र दास को उसके फैक्ट्री सुपरवाइजरों ने नौकरी से इस्तीफा देने के लिए मजबूर किया। इसके बाद उसे कार्यस्थल से घसीटकर एक उग्र स्थानीय भीड़ के हवाले कर दिया गया। भीड़ ने दीपू चंद्र दास को बेरहमी से पीटा, फिर उसकी हत्या कर शव को पेड़ से लटका दिया और आग लगा दी। जांचकर्ताओं का कहना है कि इस हमले में उसके कुछ सहकर्मी भी शामिल थे। घटना के तुरंत बाद मुख्य आरोपी यासीन आराफात इलाके से फरार हो गया था, जिसे गुरुवार को गिरफ्तार कर लिया गया।
भीड़ को भड़काने का आरोप
पुलिस के मुताबिक, यासीन आराफात ने समुदाय में अपने प्रभाव का इस्तेमाल कर तेजी से भीड़ जुटाई और उसे उकसाया। ईशनिंदा के आरोप को उसने एक घातक भीड़ हमले में बदल दिया। जांच एजेंसियों का दावा है कि आराफात ने न केवल हिंसा भड़काई, बल्कि खुद दीपू चंद्र दास को घसीटकर एक नजदीकी चौराहे तक ले गया, जहां उसे फांसी दी गई और फिर आग लगा दी गई।
यासीन आराफात की गिरफ्तारी के साथ ही इस मामले में गिरफ्तार लोगों की कुल संख्या 11 हो गई है। इससे पहले पुलिस ने जांच के दौरान 10 अन्य संदिग्धों को भी हिरासत में लिया था। पुलिस का कहना है कि मामले की जांच जारी है और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

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