नई दिल्ली, 22 जनवरी : 12 जून 2025 को 242 यात्रियों को लेकर उड़ान भरने वाला एयर इंडिया का विमान AI-171 अहमदाबाद में दुर्घटनाग्रस्त हो गया था। उड़ान भरने के कुछ ही समय बाद विमान एक मेडिकल अस्पताल की इमारत से टकरा गया। हादसे को कई महीने बीत चुके हैं, लेकिन अब तक दुर्घटना के असली कारणों को लेकर स्थिति पूरी तरह साफ नहीं हो सकी है। अमेरिका के ‘एविएशन सेफ्टी कैंपेन ग्रुप’ का दावा है कि एयर इंडिया के बोइंग 787 विमान में पहले से ही गंभीर तकनीकी खामियां मौजूद थीं। अहमदाबाद एयरपोर्ट से उड़ान भरने से पहले विमान को कई बार तकनीकी दिक्कतों का सामना करना पड़ा था।
अमेरिकी संसद में पेश हुई FAS की रिपोर्ट
फाउंडेशन फॉर एविएशन सेफ्टी (FAS) ने 12 जनवरी 2026 को अमेरिकी संसद में एक रिपोर्ट पेश की। रिपोर्ट के अनुसार, एयर इंडिया के बेड़े में शामिल होने के बाद से ही इस विमान में तकनीकी समस्याएं सामने आने लगी थीं। FAS का कहना है कि विमान की इंजीनियरिंग, गुणवत्ता और रख-रखाव में गंभीर कमियां थीं।
रिपोर्ट में इलेक्ट्रॉनिक और सॉफ्टवेयर फेलियर, सर्किट ब्रेकर का बार-बार ट्रिप होना, खराब वायरिंग, शॉर्ट सर्किट, बिजली आपूर्ति में कमी और पावर सिस्टम के अधिक गर्म होने जैसी समस्याओं का उल्लेख किया गया है, जिनकी शिकायतें पहले भी दर्ज की जा चुकी थीं।
बोइंग की प्रतिक्रिया
FAS के आरोपों पर बोइंग ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि वह संयुक्त राष्ट्र के अंतरराष्ट्रीय नागरिक उड्डयन संगठन (ICAO) के सभी प्रोटोकॉल का पालन करता है। बोइंग के प्रवक्ता ने कहा, “भारत में हुई विमान दुर्घटना को लेकर AAIB जो भी फैसला करेगा, हम उसका पालन करेंगे।” इस पूरे मामले पर एयर इंडिया की ओर से अब तक कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।
विमान दुर्घटना जांच ब्यूरो (AAIB) की प्रारंभिक रिपोर्ट में संकेत दिए गए थे कि ‘फ्यूल स्विच’ बंद होने की वजह से विमान दुर्घटनाग्रस्त हो सकता है। इसकी तुलना बोइंग 737 मैक्स हादसे से भी की गई थी।
बोइंग 787 पर FAS के गंभीर आरोप
FAS ने दावा किया है कि बोइंग 787 परियोजना अपने तय कार्यक्रम से करीब तीन साल पीछे चल रही है और इसका बजट अरबों डॉलर तक पहुंच चुका है। रिपोर्ट के मुताबिक, दुनिया भर में बोइंग 787 के 2000 से अधिक विमानों में सिस्टम फेलियर की घटनाएं सामने आ चुकी हैं। रिपोर्ट के अनुसार, बोइंग 787 विमान वर्ष 2011 में तैयार हुआ था और दिसंबर 2013 में इसकी पहली उड़ान हुई। 28 जनवरी 2014 को यह विमान एयर इंडिया को सौंपा गया, जबकि 8 फरवरी 2014 को इसने अपनी पहली वाणिज्यिक उड़ान भरी थी।
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