February 11, 2026

राष्ट्रगान के बाद 6 छंदों वाला ‘वंदे मातरम्’ अनिवार्य, नई गाइडलाइंस जारी

राष्ट्रगान के बाद 6 छंदों वाला ‘वंदे मातरम्...

नई दिल्ली, 11 फरवरी : केंद्र सरकार ने ‘वंदे मातरम्’ को लेकर बुधवार सुबह नए दिशा-निर्देश जारी किए हैं। नए नियमों के तहत अब सरकारी कार्यक्रमों, स्कूलों और कई महत्वपूर्ण आयोजनों में ‘वंदे मातरम्’ बजाना अनिवार्य होगा। इस दौरान सभी लोगों को राष्ट्रगान ‘जन गण मन’ की तरह खड़े होकर सम्मान देना होगा। हालांकि, सिनेमा हॉल में फिल्मों के दौरान यह नियम लागू नहीं होगा।

राष्ट्रगान के तुरंत बाद बजेगा ‘वंदे मातरम्’

केंद्रीय गृह मंत्रालय के नए निर्देशों के अनुसार, किसी भी सरकारी कार्यक्रम में पहले राष्ट्रगान ‘जन गण मन’ और उसके तुरंत बाद ‘वंदे मातरम्’ बजाया जाएगा। सरकार ने स्पष्ट किया है कि गीत के पूरे छह छंद प्रस्तुत किए जाएंगे।

सभी सरकारी समारोहों में होगा लागू

नए नियमों के तहत ‘वंदे मातरम्’ अब पद्म पुरस्कार जैसे नागरिक सम्मान समारोहों में भी अनिवार्य रूप से बजाया जाएगा।

  • राष्ट्रपति के किसी भी कार्यक्रम में उनके आगमन और प्रस्थान के समय यह गीत बजाया जाएगा।
  • राष्ट्रपति या राज्यपाल के आगमन, विदाई, भाषण से पहले और बाद में भी इसे बजाना जरूरी होगा।
  • तिरंगा फहराने के अवसर पर भी इसका पालन किया जाएगा।

गृह मंत्रालय ने निर्देश दिया है कि जब भी यह गीत गाया या बजाया जाए, उपस्थित सभी लोग सावधान मुद्रा में खड़े रहेंगे।

पूरे छह छंद बजाने का निर्णय

सबसे महत्वपूर्ण बदलाव यह है कि अब ‘वंदे मातरम्’ के सभी छह छंद बजाए जाएंगे। इनमें से चार छंद 1937 में कांग्रेस द्वारा हटा दिए गए थे। सरकार का कहना है कि यह फैसला स्वतंत्रता संग्राम के इस गीत को उसके मूल स्वरूप और शक्ति के साथ प्रस्तुत करने की दिशा में उठाया गया कदम है। पूरे छह छंदों की अवधि लगभग 3 मिनट 10 सेकंड होगी।

क्या है ‘वंदे मातरम्’ का इतिहास?

  • ‘वंदे मातरम्’ की रचना बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय ने 1875 में की थी।
  • यह 1882 में उनके उपन्यास ‘आनंदमठ’ में प्रकाशित हुआ।
  • गीत में कुल छह छंद हैं।

प्रारंभिक छंद: भारत माता का वर्णन करते हैं।
बाद के छंद: इनमें दुर्गा, कमला (लक्ष्मी) और सरस्वती जैसी हिंदू देवियों का उल्लेख है।

1937 में कांग्रेस के फैजपुर अधिवेशन में केवल पहले दो छंदों को अपनाया गया था, क्योंकि कुछ मुस्लिम सदस्यों ने देवी-देवताओं के उल्लेख पर आपत्ति जताई थी। अब केंद्र सरकार ने सभी छह छंदों को अनिवार्य रूप से शामिल करने का फैसला किया है।

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