April 15, 2026

ओपन ए.आई. के सैम ऑल्टमैन ने दुनियां को खतरनाक और डरावनी जगह बताया

ओपन ए.आई. के सैम ऑल्टमैन ने दुनियां...

नई दिल्ली, 28 फरवरी: सैम ऑल्टमैन ने हाल ही में एक पोस्ट के माध्यम से यह बयान देकर टेक्नोलॉजी की दुनिया में हलचल मचा दी है कि “दुनिया एक खतरनाक और डरावनी जगह है।” इस बयान के साथ ही उन्होंने OpenAI के अमेरिकी रक्षा मंत्रालय के साथ सहयोग की घोषणा की, जिसे पहले ‘Department of War’ के नाम से जाना जाता था।

सेना संग मिलाया हाथ

इस सहयोग के तहत, दुनिया के सबसे तेज AI तकनीक को पहली बार सेना के अत्यंत गोपनीय और सुरक्षित ‘क्लासिफाइड’ नेटवर्क पर तैनात किया जाएगा। सैम के इस ऐलान ने एक बार फिर से युद्ध और जासूसी में AI के उपयोग को लेकर बहस को तेज कर दिया है, जिससे यह सवाल उठता है कि क्या तकनीकी प्रगति मानवता के लिए सुरक्षा का साधन बन सकती है या यह और भी अधिक खतरनाक साबित होगी।

सेना के गुप्त नेटवर्क पर तैनात 

सैम ऑल्टमैन ने हाल ही में एक बयान में दुनिया को एक खतरनाक और डरावनी जगह बताते हुए अपने AI मॉडल को सेना के प्राइवेट नेटवर्क पर तैनात करने की योजना का खुलासा किया। उन्होंने उल्लेख किया कि रक्षा मंत्रालय के साथ हुई बातचीत में सुरक्षा के प्रति गंभीरता दिखाई गई, जिसके कारण यह निर्णय लिया गया कि ये AI मॉडल केवल क्लाउड नेटवर्क पर ही तैनात किए जाएंगे।

इसके साथ ही, सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए विशेष सुरक्षा उपायों या कवचों का निर्माण भी किया जाएगा। ऑल्टमैन ने अन्य AI कंपनियों को भी सलाह दी कि वे सरकार के साथ इसी प्रकार की शर्तों पर काम करें, ताकि सुरक्षा और प्रभावशीलता दोनों को सुनिश्चित किया जा सके।

खतरनाक दुनियां का बहाना, युद्ध में होगा इस्तेमाल

रिपोर्टों के अनुसार, इस डील के बाद यह चर्चा फिर से तेज हो गई है कि क्या अब युद्ध में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का उपयोग किया जाएगा या युद्ध संबंधी निर्णय AI के माध्यम से लिए जाएंगे। इस विषय पर सैम ऑल्टमैन ने स्पष्ट विचार व्यक्त किए हैं। उन्होंने दो प्रमुख सिद्धांतों का उल्लेख किया है: पहला, घरेलू मास सर्विलांस, यानी आम लोगों की निगरानी, और दूसरा, स्वचालित हथियारों पर पूर्ण प्रतिबंध, जो बिना मानव हस्तक्षेप के कार्य करते हैं।

ऑल्टमैन ने इसे समझौते का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बनाने की बात की है और बताया है कि रक्षा मंत्रालय इन दोनों सिद्धांतों को समझौते में शामिल करने के लिए सहमत हो गया है। वे बार-बार यह भी कह चुके हैं कि उनका मिशन AI के लाभों को सभी तक समान रूप से पहुंचाना है, और इसी कारण उन्होंने यह डील की है। इस बीच, एंथ्रोपिक जैसी प्रतिस्पर्धी कंपनियां सेना द्वारा AI के विभिन्न उपयोगों के दबाव का सामना कर रही हैं।

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