कोलकाता/नई दिल्ली, 17 मार्च : पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनावों के ऐलान के ठीक एक दिन बाद चुनाव आयोग द्वारा बड़े स्तर पर किए गए प्रशासनिक फेरबदल ने सियासी माहौल को गरमा दिया है। मुख्य सचिव और डीजीपी समेत कई शीर्ष अधिकारियों को हटाए जाने के बाद भाजपा और सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस आमने-सामने आ गए हैं।
चुनाव आयोग का बड़ा फैसला
चुनाव आयोग ने देर रात जारी आदेशों में पश्चिम बंगाल की मुख्य सचिव नंदिनी चक्रवर्ती, गृह सचिव जगदीश प्रसाद मीणा और बाद में डीजीपी पियूष पांडे तथा कोलकाता पुलिस आयुक्त सुप्रतीम सरकार को उनके पदों से हटा दिया। आयोग ने साफ किया कि यह कदम राज्य में स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित करने के लिए उठाया गया है। आयोग ने उत्तर बंगाल विकास विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव को नया मुख्य सचिव नियुक्त किया है। वहीं, महिला एवं बाल विकास विभाग की सचिव संघमित्रा घोष को गृह सचिव बनाया गया है।
इसके अलावा सिद्धनाथ गुप्ता को नया डीजीपी और अजय कुमार नंद को कोलकाता पुलिस आयुक्त नियुक्त किया गया है। अजय मुकुंद रानाडे को एडीजी (कानून-व्यवस्था) की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
संसद में उठा मुद्दा
तृणमूल कांग्रेस ने इस फैसले का कड़ा विरोध किया। पार्टी नेता डेरेक ओ’ब्रायन ने राज्यसभा में यह मुद्दा उठाया और विरोध स्वरूप वॉकआउट किया। पार्टी के अन्य नेताओं सौगत रॉय और कीर्ति आजाद ने भी इस कार्रवाई को गलत करार दिया। तृणमूल कांग्रेस के नेताओं ने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग भाजपा के प्रभाव में काम कर रहा है। वहीं समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने भी आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि जिन राज्यों में भाजपा की सरकार नहीं है, वहां इस तरह की कार्रवाई अधिक होती है।
निष्पक्ष चुनाव पर जोर
चुनाव आयोग ने अपने बयान में कहा कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के निर्देश पर यह कदम उठाया गया है, ताकि राज्य में निष्पक्ष और पारदर्शी चुनाव कराए जा सकें। हटाए गए अधिकारियों को चुनाव से जुड़े किसी भी पद पर तैनात नहीं किया जाएगा।
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