चंडीगढ़, 26 मार्च : पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट ने पंजाब पुलिस के एक एसपी रैंक अधिकारी पर लगे यौन शोषण, मारपीट और जबरन गर्भपात जैसे गंभीर आरोपों की जांच तीन हफ्तों के भीतर पूरी करने का आदेश दिया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि जांच पारदर्शी, निष्पक्ष और कानून के अनुसार होनी चाहिए। यह आदेश जस्टिस शालिनी सिंह नागपाल की बेंच ने एक महिला द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया। अदालत ने कहा कि पीड़िता को न्याय दिलाना सर्वोच्च प्राथमिकता है।
शादी का झांसा देकर शोषण का आरोप
याचिका के अनुसार, पीड़िता की मुलाकात एसपी अधिकारी से एक मामले के सिलसिले में हुई थी। आरोप है कि अधिकारी ने उसे विश्वास में लेकर मंदिर में शादी करने का दावा किया और बाद में लगातार यौन शोषण किया। पीड़िता ने यह भी आरोप लगाया कि उसे दो बार जबरन गर्भपात कराने के लिए मजबूर किया गया। यह मामला और भी गंभीर हो जाता है क्योंकि इसमें सत्ता के दुरुपयोग की बात सामने आई है।
भ्रष्टाचार और अवैध संपत्ति के आरोप
याचिका में आरोपी अधिकारी पर भ्रष्टाचार के भी गंभीर आरोप लगाए गए हैं। कहा गया है कि उसने अपने पद का दुरुपयोग कर अवैध संपत्ति बनाई। सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से पेश अतिरिक्त एडवोकेट जनरल ने बताया कि शिकायत पहले ही एसएसपी मोगा को सौंपी जा चुकी है। अधिकारी के एसपी रैंक का होने के कारण जांच ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टिगेशन पंजाब को सौंप दी गई है, जबकि आईजीपी फरीदकोट रेंज इसकी निगरानी कर रहे हैं।
कोर्ट ने मांगा ‘स्पीकिंग ऑर्डर’
हाई कोर्ट ने निर्देश दिया कि जांच पूरी होने के बाद एक स्पष्ट और कारणों सहित आदेश (स्पीकिंग ऑर्डर) जारी किया जाए, ताकि यह साफ हो सके कि किन तथ्यों के आधार पर फैसला लिया गया। अदालत ने यह भी कहा कि यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो आरोपी अधिकारी के खिलाफ कानून के तहत सख्त कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
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