चंडीगढ़, 30 मार्च : पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय ने ‘मुख्यमंत्री तीर्थ यात्रा योजना’ पर सुनवाई के दौरान महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए कहा कि यदि इस योजना में आय की सीमा तय होती, तो यह अधिक उपयुक्त होता। हालांकि, अदालत ने योजना में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया। मुख्य न्यायाधीश शील नागू और न्यायमूर्ति रमेश कुमारी की डिवीजन बेंच ने कहा कि योजना का लाभ उन लोगों तक सीमित होना चाहिए था, जो तीर्थ यात्रा का खर्च उठाने में सक्षम नहीं हैं।
PIL के जरिए उठाया गया मुद्दा
यह मामला आरटीआई कार्यकर्ता परविंदर सिंह कित्तणा द्वारा दायर जनहित याचिका (PIL) में उठाया गया। याचिका वकील एच.सी. अरोड़ा और सुनेना के माध्यम से पेश की गई। याचिकाकर्ता ने योजना को कई आधारों पर चुनौती दी, खासतौर पर आय सीमा की अनुपस्थिति पर। वकील ने दलील दी कि केंद्र सरकार की हज सब्सिडी योजना पर सुप्रीम कोर्ट पहले ही निर्देश दे चुका है कि इसे चरणबद्ध तरीके से खत्म किया जाए और फंड का उपयोग शिक्षा व सामाजिक विकास में किया जाए।
चुनाव से पहले योजना लाने पर सवाल
याचिका में यह भी कहा गया कि 20 नवंबर 2023 को तैयार की गई यह योजना 16 मार्च 2024 को घोषित लोकसभा चुनावों से पहले मतदाताओं को प्रभावित करने के उद्देश्य से लाई गई थी। हालांकि अदालत ने योजना में दखल देने से इनकार करते हुए याचिकाकर्ता को राज्य सरकार के समक्ष अपनी आपत्तियां और शिकायतें रखने की अनुमति दी।कोर्ट ने कहा कि यदि याचिकाकर्ता अपनी प्रतिनिधित्व दाखिल करता है, तो राज्य सरकार कानून के अनुसार उस पर विचार कर उचित निर्णय लेगी।
यह भी देखें : टैक्स चोरी के आरोपों के बीच पेट पूजा एप पर सरकार का सख्त एक्शन

More Stories
1 अप्रैल से गेहूं खरीद सीजन शुरू, सरकार की तैयारियां पूरी
पीपीसीबी ने ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम-2026 पर कार्यशाला आयोजित की
टैक्स चोरी के आरोपों के बीच पेट पूजा एप पर सरकार का सख्त एक्शन