नई दिल्ली, 10 अप्रैल : बिहार की राजनीति के दिग्गज नेता Nitish Kumar ने आज राज्यसभा सदस्य के रूप में शपथ लेकर राज्य की सक्रिय राजनीति से अपनी पारी समाप्त कर दी। 75 वर्षीय नितीश कुमार National Democratic Alliance के उम्मीदवार के रूप में उच्च सदन के लिए चुने गए हैं। नितीश कुमार के संसद पहुंचने के बाद अब Bharatiya Janata Party के लिए बिहार में अपना मुख्यमंत्री बनाने का रास्ता साफ हो गया है। यह राज्य के राजनीतिक इतिहास में पहली बार होगा जब भाजपा सीधे तौर पर मुख्यमंत्री पद संभाल सकती है।
लंबा और उतार-चढ़ाव भरा राजनीतिक सफर
सूत्रों के अनुसार, नई सरकार की रूपरेखा Vaisakhi (13 अप्रैल) के बाद स्पष्ट हो जाएगी। इससे पहले राजनीतिक हलचल तेज होने की संभावना है। नितीश कुमार ने अपनी राजनीतिक यात्रा 1985 में विधायक के रूप में शुरू की थी। वे Atal Bihari Vajpayee की सरकार में केंद्रीय मंत्री भी रह चुके हैं।
साल 2005 से लेकर अब तक (कुछ समय को छोड़कर) वे बिहार के मुख्यमंत्री रहे और राज्य की राजनीति में एक प्रमुख चेहरा बने रहे। नितीश कुमार का राजनीतिक सफर काफी दिलचस्प रहा है। 2013 के बाद उन्होंने चार बार राजनीतिक पाला बदला। जब भी उन्हें अपनी सत्ता या पार्टी पर खतरा महसूस हुआ, उन्होंने नए गठबंधन के साथ सरकार बनाई।
बेटे निशांत कुमार की राजनीति में एंट्री
दिल्ली रवाना होने से पहले नितीश कुमार ने अपने बेटे Nishant Kumar को Janata Dal (United) के जरिए राजनीति में उतार दिया है। निशांत फिलहाल पूरे बिहार का दौरा कर रहे हैं। हालांकि, नितीश कुमार जैसा राजनीतिक कद हासिल करना उनके लिए बड़ी चुनौती माना जा रहा है।
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