नई दिल्ली, 15 अप्रैल : आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक और दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री Arvind Kejriwal ने Delhi High Court में एक अतिरिक्त हलफनामा दाखिल कर नया कानूनी तर्क पेश किया है। इस हलफनामे में उन्होंने जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा के बेटे को केंद्र सरकार की पैनल प्रणाली के तहत आवंटित मामलों का विवरण रिकॉर्ड पर रखा है। साथ ही, उन्होंने जस्टिस शर्मा से आबकारी नीति मामले की सुनवाई से खुद को अलग (रिक्यूज) करने की मांग दोहराई है।
“हितों के टकराव” का हवाला
Arvind Kejriwal ने अपने हलफनामे में “हाल ही में सामने आए तथ्यों” का जिक्र करते हुए कहा कि ये उनकी रिक्यूजल अर्जी के लिए ठोस आधार प्रदान करते हैं। उन्होंने सरकारी अधिसूचनाओं और सार्वजनिक रिकॉर्ड का हवाला देते हुए बताया कि जज के पुत्र सहित उनके परिवार के सदस्य केंद्र सरकार के वकीलों के पैनल में शामिल हैं।
हलफनामे में यह भी कहा गया है कि इन वकीलों को Tushar Mehta जैसे विधि अधिकारियों द्वारा उसी ढांचे के तहत मामले आवंटित किए जाते हैं, जो केंद्र सरकार के अधीन कार्य करता है। केजरीवाल ने आंकड़े देते हुए बताया कि जज के पुत्र को 2023 में 2,487, 2024 में 1,784 और 2025 में 1,633 मामले आवंटित किए गए।
न्यायिक निष्पक्षता पर उठाए सवाल
केजरीवाल ने तर्क दिया कि केंद्र सरकार के साथ यह पेशेवर संबंध “जीवंत, निरंतर और पर्याप्त” है, जिससे ‘हितों के टकराव’ (Conflict of Interest) की आशंका पैदा होती है। हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि वह न्यायाधीश पर किसी व्यक्तिगत पक्षपात का आरोप नहीं लगा रहे हैं। उन्होंने कहा कि उनका तर्क उस स्थापित कानूनी सिद्धांत पर आधारित है, जिसके अनुसार न्याय केवल होना ही नहीं चाहिए, बल्कि होता हुआ दिखाई भी देना चाहिए।
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