नई दिल्ली, 19 अप्रैल: राष्ट्रीय प्राणी उद्यान दिल्ली और पटना चिड़ियाघर के बीच चल रहे वन्यजीव आदान-प्रदान कार्यक्रम ने रफ्तार पकड़ ली है। यह पहल न केवल दिल्ली के वन्यजीव प्रेमियों को नई प्रजातियों को करीब से देखने का मौका देगी, बल्कि जैव विविधता संरक्षण की दिशा में भी अहम कदम साबित हो रही है।
सूत्रों के अनुसार, 11 अप्रैल को पटना चिड़ियाघर से कई दुर्लभ जानवर सुरक्षित रूप से दिल्ली पहुंचे। इनमें भारतीय धूसर भेड़िया के दो नर और दो मादा, एक बाघ, चार घड़ियाल, दो धामन सांप और दो बार्न आउल शामिल हैं। नए आए उल्लुओं को फिलहाल क्वारंटीन में रखा गया है, जहां विशेषज्ञों और पशु चिकित्सकों की टीम उनकी 24 घंटे निगरानी कर रही है। प्रशासन के अनुसार, सभी आवश्यक स्वास्थ्य जांच पूरी होने के बाद इन जानवरों को जल्द ही दर्शकों के लिए बाड़ों में रखा जाएगा, जिससे चिड़ियाघर का आकर्षण और बढ़ेगा।
दिल्ली से पटना भी भेजे गए वन्यजीव
इस आदान-प्रदान कार्यक्रम के तहत 14 अप्रैल को दिल्ली से भी कई दुर्लभ प्रजातियों के जानवर पटना भेजे गए, जो वहां सुरक्षित पहुंच चुके हैं। इस खेप में संगाई हिरण के दो नर और चार मादा, एक मादा सफेद बाघ, चार पेंटेड सारस, चार ग्रेट व्हाइट पेलिकन और एक दुर्लभ काला हिरण शामिल हैं। वन्यजीवों के इस आदान-प्रदान के दौरान अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा मानकों का पूरी तरह पालन किया गया, ताकि लंबी यात्रा के दौरान जानवरों पर किसी प्रकार का नकारात्मक प्रभाव न पड़े।
जैव विविधता संरक्षण की दिशा में बड़ा कदम
दिल्ली चिड़ियाघर के निदेशक संजीत कुमार ने कहा कि यह सहयोग सिर्फ जानवरों का आदान-प्रदान नहीं, बल्कि जैव विविधता को सुरक्षित रखने की दिशा में एक दूरदर्शी पहल है। इससे दुर्लभ प्रजातियों के सुरक्षित प्रजनन और उनकी आनुवंशिक विविधता बनाए रखने में मदद मिलेगी।

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