पटियाला, 21 अप्रैल: पटियाला निवासी गुरपिंदर जीत सिंह की जिंदगी पांच महीने पहले अचानक मुश्किल मोड़ पर आ गई, जब उनकी 65 वर्षीय मां बलजीत कौर की सेहत लगातार बिगड़ने लगी। वे धीरे-धीरे खाना-पीना छोड़ रही थीं, जिससे परिवार की चिंता बढ़ती जा रही थी।
शुरुआत में निजी डॉक्टरों से इलाज करवाया गया, लेकिन जब हालत में सुधार नहीं हुआ तो उन्हें Rajindra Hospital में भर्ती कराया गया। दवाइयों और जांचों के बावजूद स्थिति बिगड़ती गई। अंततः रिपोर्ट में पता चला कि उन्हें गर्भाशय का कैंसर है।
मां की जान बचाने के लिए गुरपिंदर उन्हें Tata Memorial Cancer Hospital ले गए। इलाज शुरू होते ही 60–65 हजार रुपये खर्च हो गए। एक ड्राइवर के लिए यह रकम बहुत बड़ी थी और कर्ज लेने की नौबत आ गई।
मुख्यमंत्री सेहत योजना बनी सहारा
इसी मुश्किल समय में एक व्यक्ति ने उन्हें Mukhyamantri Sehat Yojana के बारे में बताया। गुरपिंदर ने तुरंत रजिस्ट्रेशन करवाया और कुछ ही समय में स्मार्ट कार्ड बन गया। इस योजना के तहत महंगे टेस्ट, कीमोथेरेपी, दवाइयां, ऑपरेशन, आईसीयू, वेंटिलेटर और अस्पताल में रहने-खाने का पूरा खर्च सरकार ने उठाया।
इलाज के बाद ट्यूमर एक जगह सिमट गया, जिसके बाद डॉक्टरों ने करीब 8 घंटे लंबा ऑपरेशन कर उसे निकाल दिया। 35–40 टांकों के बावजूद बलजीत कौर ने हिम्मत नहीं हारी। ऑपरेशन के बाद कुछ दिन आईसीयू और वेंटिलेटर पर रहने के बाद उनकी हालत में सुधार हुआ और उन्हें वार्ड में शिफ्ट कर दिया गया। यह योजना परिवार के लिए बड़ा सहारा साबित हुई और बलजीत कौर को नया जीवन मिला।

More Stories
फगवाड़ा में डीएसपी योगेश कुमार की गोली लगने से मौत, सफाई के दौरान चली गोली
आप विधायक पठानमाजरा की जमानत अर्जी खारिज, पटियाला जेल प्रशासन को नोटिस
नीदरलैंड दौरे पर CM भगवंत मान, क्या पंजाब को होगा आर्थिक फायदा