April 23, 2026

आनलाइन गेमिंग पर सरकार ने कसा शिकंजा, 1 मई से रिजस्ट्रेशन जरूरी

आनलाइन गेमिंग पर सरकार ने कसा शिकंजा...

नई दिल्ली, 23 अप्रैल : देश के करोड़ों मोबाइल गेमर्स और तेजी से बढ़ते डिजिटल गेमिंग सेक्टर के लिए केंद्र सरकार ने ‘ऑनलाइन गेमिंग (प्रोत्साहन और विनियमन) नियम, 2026’ जारी कर दिए हैं। ये नियम 1 मई 2026 से लागू होंगे और गेमिंग इंडस्ट्री में बड़ा बदलाव लाने की उम्मीद है।

‘स्किल’ और ‘सट्टा’ के बीच साफ सीमा

Ministry of Electronics and Information Technology (MeitY) द्वारा लाए गए इन नियमों का मुख्य उद्देश्य यह तय करना है कि कौन सा गेम कौशल (Skill) पर आधारित है और कौन सा सट्टेबाजी (Betting) की श्रेणी में आता है। सरकार ने साफ कर दिया है कि अब ‘स्किल गेम’ के नाम पर सट्टा चलाना संभव नहीं होगा। नए नियमों के तहत ‘ऑनलाइन गेमिंग अथॉरिटी ऑफ इंडिया (OGAI)’ का गठन किया जाएगा, जिसका मुख्यालय दिल्ली-एनसीआर में होगा। यह अथॉरिटी गेम्स की कानूनी स्थिति तय करेगी, एल्गोरिदम और सिस्टम की जांच करेगी, फीस, इनाम और पारदर्शिता का मूल्यांकन करेगी। यह एक तरह का डिजिटल वॉचडॉग होगा।

बिना सर्टिफिकेट नहीं होगा प्रमोशन

अब कोई भी स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म, जैसे Disney+ Hotstar, उन गेमिंग ऐप्स का प्रचार नहीं कर सकेगा जिनके पास OGAI का डिजिटल रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट नहीं होगा।इससे आईपीएल जैसे बड़े इवेंट्स के दौरान दिखने वाले सट्टा-आधारित विज्ञापनों पर लगाम लगेगी। नए नियमों में बैंकों और वित्तीय संस्थानों को भी शामिल किया गया है। अब वे किसी भी गेमिंग ट्रांजैक्शन को मंजूरी देने से पहले यह सुनिश्चित करेंगे कि संबंधित गेम रजिस्टर्ड है या नहीं। इससे विदेशी सट्टेबाजी ऐप्स पर बड़ा असर पड़ेगा।

90 दिन की जांच प्रक्रिया

हर गेमिंग कंपनी को अपने गेम्स की पूरी जानकारी सरकार को देनी होगी। जांच में यह देखा जाएगा क्या इनाम जीतने की संभावना स्पष्ट है?, क्या फीस उचित है?, क्या इन-गेम आइटम्स (जैसे स्किन, गन) का बाहरी व्यापार हो रहा है? जो गेम इस जांच में पास होंगे, उन्हें 10 साल का डिजिटल सर्टिफिकेट मिलेगा। सरकार ने पहली बार ई-स्पोर्ट्स को पेशेवर पहचान देने की दिशा में कदम उठाया है। पूरी तरह स्किल आधारित गेम्स को प्रोत्साहन मिलेगा, लेकिन निगरानी भी जारी रहेगी।

बच्चों और डेटा सुरक्षा पर खास फोकस

सरकार को यह अधिकार होगा कि वह ऐसे गेम्स को अनिवार्य रजिस्ट्रेशन में लाए जो बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य के लिए खतरा हों, बड़े स्तर पर पैसों का लेन-देन शामिल करते हों, साथ ही, कंपनियों को भारतीय यूजर्स का डेटा सुरक्षित रखना अनिवार्य होगा।

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