नई दिल्ली, 23 अप्रैल : दिल्ली हाईकोर्ट ने अदालत की कार्यवाही का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के मामले में कड़ा रुख अपनाया है। कोर्ट ने कहा कि न्यायिक प्रक्रिया की गरिमा बनाए रखना बेहद जरूरी है और किसी भी तरह की अनधिकृत रिकॉर्डिंग या प्रसारण स्वीकार नहीं किया जाएगा। अदालत ने अरविंद केजरीवाल को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। यह मामला कोर्ट की कार्यवाही के कथित अवैध रिकॉर्डिंग और प्रसारण से जुड़ा हुआ है।
कोर्ट ने X, Google और Meta को निर्देश दिया कि अदालत से जुड़े सभी वीडियो और पोस्ट तुरंत हटाए जाएं। मेटा ने कोर्ट को जानकारी दी कि उसने ऐसे कंटेंट पहले ही हटा दिए हैं, जबकि गूगल को भी निर्देश दिए गए कि यदि कोई वीडियो मौजूद है तो उसे तुरंत हटाया जाए।
PIL में कई लोगों पर आरोप
यह मामला अधिवक्ता वैभव सिंह द्वारा दायर जनहित याचिका (PIL) से जुड़ा है। याचिका में केजरीवाल के अलावा कई अन्य नेताओं और रवीश कुमार पर भी अदालत की कार्यवाही को अवैध रूप से रिकॉर्ड और साझा करने का आरोप लगाया गया है। साथ ही, सभी के खिलाफ अवमानना कार्रवाई की मांग की गई है। पूरा विवाद दिल्ली के चर्चित एक्साइज पॉलिसी मामले से जुड़ा है। 13 अप्रैल को केजरीवाल ने अदालत में पेश होकर जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा के समक्ष अपनी दलीलें रखी थीं।
इसी सुनवाई का वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आने के बाद मामला तूल पकड़ गया। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने पूछा कि क्या ऐसे पोस्ट अपने आप हटाए जा सकते हैं। इस पर मेटा के वकील ने बताया कि तकनीकी रूप से यह संभव नहीं है, लेकिन कोर्ट या सरकार के आदेश मिलने पर 24 घंटे के भीतर कंटेंट हटा दिया जाता है।
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