April 25, 2026

ममता बनर्जी की ‘पंजाबी शायरी’ “सरफरोशी की तमन्ना” को लेकर उठे सवाल

ममता बनर्जी की ‘पंजाबी शायरी’ “सरफरोशी की ...

कोलकाता: पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी एक नए विवाद में घिर गई हैं। बैसाखी के अवसर पर कोलकाता के बेलेघाटा में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान दिए गए उनके बयान ने सियासी बहस छेड़ दी है। वायरल वीडियो क्लिप में ममता बनर्जी सिख समुदाय को संबोधित करते हुए कहती नजर आती हैं, “आज थोड़ी पंजाबी शायरी हो जाए,” जिसके बाद उन्होंने मशहूर पंक्तियों “सरफरोशी की तमन्ना…” का उल्लेख किया।

“पंजाबी नहीं, उर्दू नज़्म” बताकर उठे सवाल

सोशल मीडिया पर कई यूजर्स और आलोचकों ने इस पर आपत्ति जताई और इसे तथ्यात्मक गलती करार दिया। “सरफरोशी की तमन्ना अब हमारे दिल में है” दरअसल सरफरोशी की तमन्ना एक उर्दू नज़्म है, जिसे 1921 में बिस्मिल अज़ीमाबादी ने लिखा था। इस नज़्म को बाद में स्वतंत्रता सेनानी राम प्रसाद बिस्मिल ने आजादी के आंदोलन के दौरान लोकप्रिय बनाया, जिसके बाद यह क्रांतिकारी गीत के रूप में प्रसिद्ध हो गई।

आलोचकों का कहना है कि इस नज़्म का पंजाब या पंजाबी शायरी से कोई सीधा संबंध नहीं है, ऐसे में मुख्यमंत्री का इसे “पंजाबी शायरी” कहना गलत और भ्रामक है। इस मुद्दे को लेकर राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हो गई है। विपक्षी दलों ने इसे मुख्यमंत्री की “तथ्यों की अनदेखी” बताते हुए निशाना साधा है, जबकि समर्थक इसे एक सामान्य भाषाई चूक करार दे रहे हैं।

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