चंडीगढ़, 17 जुलाई 2026: मानसून की पहली बारिश जहाँ गर्मी से राहत देती है, वहीं लोगों के स्वास्थ्य के लिए चुनौतीपूर्ण मौसम की शुरुआत भी करती है। हर साल पूरे भारत के अस्पतालों में डेंगू, मलेरिया और बुख़ार से जुड़ी अन्य बीमारियों के मामले बढ़ जाते हैं। इस साल भी यही स्थिति देखने को मिल रही है।
अमृतसर की 32 वर्षीय बलविंदर कौर, जो इस योजना की लाभार्थी हैं, ने बताया, “मैंने हाल ही में मुख्यमंत्री सेहत योजना के तहत 8400 रुपये का इलाज करवाया।”
बलविंदर कौर को उस समय अस्पताल ले जाया गया जब उन्हें काफ़ी तेज़ बुख़ार था। उन्होंने कहा, “अस्पताल के स्टाफ़ ने मुझे मुख्यमंत्री सेहत योजना में रजिस्टर करवाने में मदद की। मैं कपड़े सिलकर अपना गुज़ारा करती हूँ। इस योजना ने समय पर इलाज और आर्थिक सहायता देकर मेरा बोझ कम किया, जिससे मैं अपनी रिकवरी पर ध्यान दे सकी। मैं मुख्यमंत्री भगवंत मान द्वारा शुरू की गई इस स्वास्थ्य योजना के लिए आभारी हूँ। यह वास्तव में ज़रूरत के समय परिवारों का साथ देती है।”
2025 में किए गए एक भारतीय अस्पताल अध्ययन में पाया गया कि मानसून के दौरान भर्ती किए गए मरीज़ों में एक्यूट फेब्राइल इलनेस (तीव्र बुख़ार वाली बीमारी) का सबसे आम कारण डेंगू था। यह निष्कर्ष दर्शाता है कि समय पर जाँच और तुरंत इलाज बेहद ज़रूरी हैं, क्योंकि मानसून से जुड़ी कई बीमारियों की शुरुआत एक जैसे लक्षणों के साथ होती है।
डॉक्टर लोगों से अपील कर रहे हैं कि लगातार रहने वाले बुख़ार को नज़रअंदाज़ न किया जाए , वहीं पंजाब में मुख्यमंत्री सेहत योजना (MMSY) योग्य परिवारों को अस्पताल के बिल की चिंता के बिना कैशलेस इलाज उपलब्ध करवा रही है।
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री डॉ. बलबीर सिंह ने कहा कि सरकार ने मच्छरों और पानी से फैलने वाली मौसमी बीमारियों में बढ़ोतरी से निपटने के लिए निगरानी, अस्पतालों की तैयारी और जाँच सुविधाओं को मज़बूत किया है। उन्होंने लोगों से सामान्य रोकथाम उपाय अपनाने की अपील की, जैसे आसपास जमा पानी को साफ़ करना और बुख़ार के शुरुआती लक्षण दिखते ही चिकित्सकीय सलाह लेना।
स्वास्थ्य मंत्री डॉ. बलबीर सिंह ने कहा, “पानी से फैलने वाली बीमारियों की रोकथाम घर से ही शुरू होती है। मच्छरों के प्रजनन को रोकने में हर परिवार, स्कूल और समुदाय की अपनी भूमिका है। साथ ही हम लोगों को यह भी बताना चाहते हैं कि मुख्यमंत्री सेहत योजना के तहत योग्य लाभार्थी बिना ख़र्च की चिंता के समय पर इलाज करवा सकते हैं।”
डॉ. राज कुमार (एम.डी. मेडिसिन), सीनियर मेडिकल ऑफ़िसर, कम्युनिटी हेल्थ सेंटर, वेरका, पंजाब ने कहा कि मरीज़ हर बुख़ार को अक्सर सामान्य वायरल संक्रमण समझने की ग़लती कर लेते हैं। उन्होंने कहा, “हर मानसून में हम ऐसे मरीज़ देखते हैं जो तीन-चार दिन घर पर इलाज करने के बाद अस्पताल पहुँचते हैं। तब तक उनमें डिहाइड्रेशन या डेंगू के चेतावनी संकेत दिखाई देने लगते हैं। एक सामान्य रक्त जाँच और समय पर इलाज गंभीर जटिलताओं से बचा सकता है। पहले 48 घंटे बेहद महत्त्वपूर्ण होते हैं।”
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