वाशिंगटन, 18 सितंबर 2026: अमेरिका रूस से तेल और गैस खरीदने वाले देशों को सजा देने के लिए तैयार है। मॉस्को से एनर्जी खरीदने वाले देशों जिनमें भारत और चीन भी शामिल हैं पर नए प्रतिबंध और 100 प्रतिशत तक टैरिफ लगाने का खतरा मंडरा रहा है। लेकिन जब बात वॉशिंगटन की अपनी न्यूक्लियर फ्यूल की जरूरतों की आती है तो नियम थोड़े फ्लैक्सिबल हो जाते हैं। इसी बिल में अमेरिका के लिए सिविल न्यूक्लियर सहयोग और रूस से कुछ खास तरह के यूरेनियम इंपोर्ट के लिए एक सुविधाजनक रास्ता भी छोड़ा गया है।
बुधवार को यूएस हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स से मंजूरी पाने वाले लिंडसे ओ. ग्राहम सैंक्शनिंग रशिया एंड ईरान एक्ट ऑफ 2026 के तहत राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को उन देशों के सामान पर 100 प्रतिशत तक टैरिफ लगाने का अधिकार मिल गया है जो रूस से कच्चा तेल या नेचुरल गैस खरीदना जारी रखते हैं या मॉस्को को प्रतिबंधों से बचने में मदद करते हैं। लेकिन रूस पर लगाए गए प्रतिबंधों के इस बड़े पैकेज में परमाणु क्षेत्र से जुड़ी एक अहम छूट भी शामिल है।
इस कानून के तहत ट्रंप को रूस से यूरेनियम के आयात पर मौजूदा पाबंदियां लागू करनी होंगी। जिसमें रोसाटॉम स्टेट एटॉमिक एनर्जी कॉर्पोरेशन और उसकी सहायक कंपनियों से सप्लाई किया जाने वाला यूरेनियम भी शामिल है। साथ ही बिल के एक और हिस्से में कहा गया है कि ये पाबंदियां अमेरिका-रूस के बीच नागरिक परमाणु सहयोग समझौतों के तहत की जाने वाली गतिविधियों या परमाणु रिएक्टरों में इस्तेमाल होने वाले कम-संवर्धित यूरेनियम के कुछ खास तरह के आयात पर लागू नहीं होंगी।
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