स्टॉकहोम, 16 अगस्त : चीन और पाकिस्तान के बीच तकनीकी गठजोड़ ने जम्मू-कश्मीर में सुरक्षा परिदृश्य को पूरी तरह से बदल दिया है। सुरक्षा बलों की यह वापसी अहिंसक आतंकवादी अभियानों से तकनीक-आधारित टकराव की ओर बदलाव का प्रतीक है। यह स्पष्ट है कि आतंकवादी किस तरह चीनी बुनियादी ढाँचे और विशेषज्ञता का फायदा उठा रहे हैं। स्टॉकहोम इंटरनेशनल पीस रिसर्च इंस्टीट्यूट की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि बीजिंग और इस्लामाबाद के बीच रणनीतिक गठबंधन ने उन्नत सैन्य उपकरणों के लिए एक मजबूत आपूर्ति श्रृंखला बनाई है।
चीन आतंकवादियों को हथियार मुहैया करा रहा है
2019 और 2023 के बीच पाकिस्तान के हथियारों के आयात में चीन की हिस्सेदारी 81 प्रतिशत रही, जिसकी कीमत लगभग 528 मिलियन डॉलर थी। यह साझेदारी पारंपरिक हथियारों से कहीं आगे तक फैली हुई है, जिसमें दोहरे उपयोग वाली तकनीकें भी शामिल हैं। ये तकनीकें जम्मू-कश्मीर में आतंकवादियों के हथियारों के जखीरे तक पहुँच गई हैं।
यूरोपियन टाइम्स में प्रकाशित एक रिपोर्ट के अनुसार, 22 अप्रैल को पहलगाम में हुए आतंकवादी हमले ने क्षेत्र में तकनीकी घुसपैठ की गंभीरता को उजागर किया है, जिसमें सुरक्षा बलों ने घटनास्थल से हुआवेई सैटेलाइट फोन, चीन निर्मित जीपीएस उपकरण, बॉडी कैमरा और एन्क्रिप्टेड संचार प्रणाली जब्त की है।
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