अमृतसर, 4 मई : अकाल तख्त के कार्यकारी जत्थेदार ज्ञानी कुलदीप सिंह गड़गज्ज ने ‘जगत जोत श्री गुरु ग्रंथ साहिब सत्कार (संशोधन) एक्ट-2026’ के मुद्दे पर पंजाब विधानसभा के स्पीकर कुलतार सिंह संधवां को 8 मई को अकाल तख्त पर उपस्थित होने के लिए बुलाया है। यह बैठक भाई गुरदास हॉल में आयोजित होगी। जत्थेदार गड़गज्ज ने कहा कि इस महत्वपूर्ण कानून को लाने से पहले अकाल तख्त, शिरोमणि कमेटी और अन्य सिख जत्थेबंदियों से कोई परामर्श नहीं किया गया, जो गंभीर चिंता का विषय है।
‘कस्टोडियन’ शब्द पर कड़ा विरोध
बैठक में सिख नेताओं ने एक्ट में इस्तेमाल किए गए ‘कस्टोडियन’ शब्द पर सख्त आपत्ति जताई। जत्थेदार ने स्पष्ट किया कि श्री गुरु ग्रंथ साहिब स्वयं पंथ के सर्वोच्च हैं, इसलिए कोई सरकार या अथॉरिटी खुद को कस्टोडियन नहीं कह सकती। जत्थेदार गड़गज्ज ने आरोप लगाया कि सरकार सिख संस्थाओं को नजरअंदाज कर धार्मिक मामलों में सीधी दखलअंदाजी कर रही है। उन्होंने सवाल उठाया कि कानून का ड्राफ्ट मांगने के बावजूद अकाल तख्त साहिब को क्यों नहीं भेजा गया।
बेअदबी मामलों में न्याय की मांग
जत्थेदार ने कहा कि बेअदबी के दोषियों को सख्त सजा देने के कदम का वे स्वागत करते हैं, लेकिन अब तक इन मामलों में न्याय न मिलना चिंता का विषय है। बैठक में बलवंत सिंह राजोआणा समेत बंदी सिंहों की रिहाई में केंद्र सरकार द्वारा डाली जा रही बाधाओं पर भी नाराजगी जताई गई। हालांकि, राजोआणा की दया याचिका वापस लेने को लेकर फिलहाल कोई अंतिम फैसला नहीं हुआ है। इस बैठक में शिरोमणि कमेटी के प्रधान एडवोकेट हरजिंदर सिंह धामी, निहंग सिंह जत्थेबंदियां और दमदमी टकसाल के प्रतिनिधियों सहित कई सिख विद्वान शामिल हुए।
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