पटियाला, 17 अप्रैल: केंद्र सरकार ने आखिरकार पंजाब को गेहूं की फसल के खरीद मानकों में ढील देने का ऐलान कर दिया है। केंद्रीय खाद्य मंत्रालय द्वारा जारी पत्र के अनुसार अब राज्य में नए मानकों के तहत गेहूं की खरीद की जाएगी, जिससे किसानों को बड़ी राहत मिली है।
नए नियमों के तहत अब पंजाब में 70 प्रतिशत तक बदरंग (लस्टर लॉस) गेहूं की भी खरीद की जाएगी। इसके अलावा सिकुड़े और टूटे दानों की सीमा को बढ़ाकर 15 प्रतिशत कर दिया गया है, जबकि खराब दानों की मात्रा 6 प्रतिशत तक स्वीकार की जाएगी।
भंडारण की अलग व्यवस्था, जिम्मेदारी राज्य की
केंद्रीय खाद्य मंत्रालय ने निर्देश दिया है कि ढील के तहत खरीदी गई फसल को अलग से स्टोर किया जाए। साथ ही यह भी स्पष्ट किया गया है कि यदि भंडारण के दौरान फसल की गुणवत्ता प्रभावित होती है, तो इसकी जिम्मेदारी राज्य सरकार की होगी।
पंजाब में हाल ही में हुई बारिश के कारण करीब 1.30 लाख एकड़ गेहूं की फसल को नुकसान पहुंचा है। इसी वजह से मंडियों में खरीद को लेकर समस्या खड़ी हो गई थी, क्योंकि एजेंसियां तय मानकों के चलते फसल खरीदने से हिचक रही थीं।
अब केंद्र के इस फैसले के बाद न सिर्फ राज्य सरकार ने राहत की सांस ली है, बल्कि किसानों और आढ़तियों को भी बड़ी राहत मिली है। मंडियों में इस समय गेहूं की आवक तेजी से बढ़ रही है। राज्य की मंडियों में अब तक 10.55 लाख मीट्रिक टन गेहूं की आवक हो चुकी है, जिसमें से 5.96 लाख मीट्रिक टन की खरीद की जा चुकी है।
एफसीआई की रिपोर्ट के बाद फैसला
भारतीय खाद्य निगम (FCI) ने हाल ही में केंद्रीय खाद्य मंत्रालय को फसल नुकसान की जांच रिपोर्ट सौंपी थी। रिपोर्ट के मुताबिक बारिश के कारण पंजाब में 80 प्रतिशत तक फसल बदरंग हो गई है, जबकि सिकुड़े और टूटे दानों का नुकसान 20 प्रतिशत तक पहुंच गया है।
रिपोर्ट में यह भी सामने आया है कि हरियाणा और राजस्थान में पंजाब की तुलना में फसल को कम नुकसान हुआ है। विशेषज्ञों का मानना है कि केंद्र सरकार के इस फैसले से अब खरीद प्रक्रिया में तेजी आएगी और किसानों को उनकी फसल का उचित मूल्य मिल सकेगा।

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पंजाब को गेहूं खरीद मानकों में राहत देगी केंद्र सरकार