नई दिल्ली, 31 दिसम्बर : दिसंबर में भारत का रूस से कच्चे तेल का आयात तेज़ी से घटा है। यह गिरावट किसी ढांचागत बदलाव के कारण नहीं, बल्कि अल्पकालिक बाधाओं और बाजार परिस्थितियों के कारण हुई है। कपलर कंपनी के ताज़ा आंकड़ों के अनुसार, दिसंबर में रूस से भारत का कच्चे तेल का आयात लगभग 12 लाख बैरल रोज़ाना रहने का अनुमान है, जबकि नवंबर में यह 18.4 लाख बैरल रोज़ाना था। यह दिसंबर 2022 के बाद का सबसे निम्न स्तर माना जा रहा है।
प्रतिबंधों और वैश्विक परिस्थितियों का असर
विश्लेषकों ने अक्टूबर में ही इस गिरावट की ओर इशारा किया था। रूस के प्रमुख निर्यातक रोसनेफ्ट और लुकऑइल पर अमेरिकी कार्रवाई और यूरोपीय संघ की रूस से जुड़े उत्पादों पर पाबंदियों के कारण यह गिरावट हुई है।
कपलर के मुख्य शोध विश्लेषक सुमित रितोलिया ने कहा, “दिसंबर में भारत में रूसी कच्चे तेल की मांग तेज़ी से घट गई है और आयात 2022 के बाद सबसे निचले स्तर पर पहुँच गया है। प्रमुख रिफाइनरी ने रोसनेफ्ट और लुकऑइल पर पाबंदियों के बाद खरीद कम कर दी है। यह अल्पकालिक समाधान लगता है और जनवरी से नए वितरक आने तथा सप्लाई चैन के पुनर्स्थापन के साथ आयात में धीरे-धीरे सुधार की उम्मीद है।”
भारत का वैश्विक परिदृश्य
भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा तेल आयातक देश है। फरवरी 2022 में यूक्रेन पर रूस के हमले के बाद भारत रूस के कच्चे तेल का सबसे बड़ा खरीदार बन गया था।
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