नई दिल्ली, 29 नवम्बर : ब्रिटेन के प्रतिष्ठित ऑक्सफोर्ड यूनियन में होने वाली एक बहस रद्द होने के बाद भारत और पाकिस्तान के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हो गया है। “पाकिस्तान के प्रति भारत की नीति एक लोकलुभावन रणनीति है जिसे सुरक्षा नीति के रूप में पेश किया जा रहा है” विषय पर यह बहस गुरुवार को आयोजित होनी थी, लेकिन कार्यक्रम शुरू होने से कुछ घंटे पहले ही स्थिति अस्पष्ट हो गई कि कौन-सा पक्ष बहस से पीछे हट गया।
पाकिस्तान का दावा भारतीय वक्ता पीछे हटे, हमें ‘वॉकओवर’ मिला
ब्रिटेन स्थित पाकिस्तान उच्चायोग ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर दावा किया कि भारतीय प्रतिनिधि बिना किसी स्पष्टीकरण के बहस से हट गए, जिसके कारण पाकिस्तान को ‘वॉकओवर’ मिला। उच्चायोग ने बताया कि पाकिस्तानी प्रतिनिधिमंडल, जिसमें पूर्व विदेश मंत्री हिना रब्बानी खार, उच्चायुक्त मोहम्मद फैसल और पूर्व जनरल जुबैर महमूद हयात शामिल थे, बहस में भाग लेने के लिए लंदन पहुँच चुका था।
पाकिस्तानी टीवी एंकर वजाहत काज़मी ने तो इसे “बौद्धिक जीत” बताते हुए आरोप लगाया कि भारतीय पक्ष “निम्न-स्तरीय विकल्प” तलाश रहा था।
पाकिस्तान का दावा निराधार
विवाद के बीच भारतीय पक्ष के पुष्टि किए गए वक्ताओं में से एक, वरिष्ठ वकील जे. साई दीपक ने पाकिस्तान के दावों को “बेशर्मी और लाचारी भरा” करार दिया।
उन्होंने ऑक्सफोर्ड यूनियन से प्राप्त आधिकारिक ईमेल साझा करते हुए बताया कि उनकी भागीदारी पूर्व निर्धारित थी।
दीपक ने यह भी स्पष्ट किया कि वरिष्ठ भारतीय वक्ता पूर्व सेना प्रमुख एम. एम. नरवणे और भाजपा नेता सुब्रमण्यम स्वामी—ने पहले ही अपना नाम वापस ले लिया था। इसके बाद यूनियन ने वैकल्पिक वक्ताओं के रूप में सुहैल सेठ और प्रियंका चतुर्वेदी से संपर्क किया, लेकिन समय की कमी के चलते दोनों ने आमंत्रण स्वीकार नहीं किया।
‘प्रबंधन में गंभीर खामियाँ’ : प्रियंका चतुर्वेदी
शिवसेना (यूबीटी) सांसद प्रियंका चतुर्वेदी ने भी सोशल मीडिया पर स्पष्ट किया कि उनसे जुलाई में प्रारंभिक रूप से संपर्क किया गया था, लेकिन 25 नवंबर को अचानक दोबारा आमंत्रण भेजे जाने पर वह शामिल नहीं हो सकीं। उन्होंने ऑक्सफोर्ड यूनियन के “दुर्भाग्यपूर्ण और अव्यवस्थित प्रबंधन” की आलोचना की।
अस्पष्टता के कारण रद्द हुई बहस
दोनों देशों की ओर से दिए गए परस्पर-विरोधी बयानों के बीच यह साफ़ है कि समन्वय की कमी और अंतिम क्षणों में हुई गड़बड़ियों के चलते बहस रद्द हुई।
ऑक्सफोर्ड यूनियन की ओर से इस विवाद पर अभी तक कोई विस्तृत आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है।
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