तिरुवनंतपुरम, 29 सितम्बर : केरल विधानसभा ने राज्य में मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के लिए भारत निर्वाचन आयोग (ईसीआई) के कदम के खिलाफ सर्वसम्मति से एक प्रस्ताव पारित किया और चुनाव आयोग से पारदर्शी तरीके से पुनरीक्षण करने का आग्रह किया।
जल्दबाजी में कदम उठाया जा रहा है
कांग्रेस के नेतृत्व वाले विपक्षी दल यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (यूडीएफ) ने पहले ही एसआईआर पर कड़ी आपत्ति जताई थी। यूडीएफ ने मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन द्वारा सदन में पेश किए गए प्रस्ताव का समर्थन किया। पिनाराई ने कहा कि चुनाव आयोग बिना किसी उचित तैयारी के जल्दबाजी में यह कदम उठा रहा है। उन्होंने कहा कि उन्हें व्यापक चिंता है कि चुनाव आयोग का एसआईआर कराने का कदम राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (एनआरसी) को गुप्त तरीके से लागू करने का एक प्रयास है।
मुख्यमंत्री ने बिहार का उदाहरण दिया, जहां एसआईआर के दौरान कई लोगों को गलत तरीके से मतदाता सूची से बाहर कर दिया गया था। नए नियमों के अनुसार, 1987 के बाद जन्मे लोगों के लिए मतदाता बनने के लिए अपने माता-पिता का नागरिकता प्रमाण पत्र देना अनिवार्य कर दिया गया है।
2003 के बाद जन्मे लोगों के लिए, माता-पिता दोनों के नागरिकता दस्तावेज़ अनिवार्य हैं। इन नियमों का आम लोगों, खासकर गरीबों, दलितों, आदिवासियों और अल्पसंख्यक समुदायों पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है। एम ने कहा कि यह लोकतंत्र के लिए एक चुनौती है और चुनाव आयोग को ऐसी गतिविधियों से बचना चाहिए।
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