नई दिल्ली, 30 सितंबर : लंदन के टैविस्टॉक स्क्वायर स्थित महात्मा गांधी की प्रतिमा के साथ हुई तोड़फोड़ ने भारत को झकझोर कर रख दिया है। भारतीय उच्चायोग ने इस शर्मनाक कृत्य की कड़ी निंदा की है और इसे अहिंसा के सिद्धांतों पर हमला बताया है। यह घटना अंतर्राष्ट्रीय अहिंसा दिवस से ठीक तीन दिन पहले हुई। उच्चायोग ने स्थानीय प्रशासन से तत्काल कार्रवाई की मांग की है और प्रतिमा को उसके मूल गौरव पर वापस लाने के लिए कदम उठाए जा रहे हैं।
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर अपनी प्रतिक्रिया में, उच्चायोग ने कहा, “यह तोड़फोड़ केवल एक प्रतिमा पर हमला नहीं है, बल्कि महात्मा गांधी की अहिंसा की विचारधारा और उनकी विरासत पर एक हिंसक हमला है।” उच्चायोग की टीम घटनास्थल पर मौजूद है और मूर्ति की पुनर्स्थापना के लिए स्थानीय अधिकारियों के साथ मिलकर काम करने को तैयार है।
प्रशासन से सख्त कार्रवाई की मांग
भारत ने इस घटना को गंभीरता से लिया है और स्थानीय प्रशासन से तत्काल कार्रवाई की अपेक्षा करता है। उच्चायोग ने स्पष्ट किया कि उसकी टीम स्थिति पर नज़र रख रही है और मूर्ति को उसकी मूल स्थिति में बहाल करने के लिए हर संभव प्रयास किए जा रहे हैं। यह घटना ऐसे समय में हुई है जब भारत और यूनाइटेड किंगडम के बीच राजनयिक संबंध मज़बूत हो रहे हैं।
इससे पहले भी कई विवाद हो चुके हैं
इस वर्ष की शुरुआत में, मार्च में, विदेश मंत्री एस. जयशंकर की यूनाइटेड किंगडम यात्रा के दौरान, खालिस्तानी समर्थकों ने लंदन में प्रदर्शन किया था। प्रदर्शनकारियों ने चैथम हाउस के बाहर नारे लगाए और झंडे लहराए। भारत ने इस घटना की निंदा करते हुए इसे लोकतांत्रिक स्वतंत्रता का हनन बताया।
विदेश मंत्रालय ने तब कहा था कि भारत ऐसी उकसावे वाली कार्रवाइयों को बर्दाश्त नहीं करेगा और उम्मीद है कि मेजबान देश अपनी कूटनीतिक जिम्मेदारियों को पूरा करेगा।
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