चंडीगढ़, 24 जुलाई 2026: पंजाब में भगवंत मान सरकार की ‘मावां-धियां सत्कार योजना’ के तहत 100 साल और उससे ज़्यादा उम्र की महिलाओं को दी जा रही आर्थिक मदद सिर्फ़ पैसे की मदद नहीं है। यह उनकी ज़िंदगी के आखिरी पड़ाव में सम्मान, आत्मनिर्भरता और आत्मविश्वास का एक नया आधार बन गई है। इनमें से कई महिलाएं चल-फिर नहीं सकतीं, ठीक से सुन नहीं सकतीं और ठीक से बोल भी नहीं सकतीं। फिर भी, 100 साल की उम्र पार कर चुकीं ये महिलाएं अच्छी तरह जानती हैं कि यह पैसा उनका है और वे इसे अपनी मर्ज़ी से खर्च कर सकती हैं। इस अधिकार का एहसास उन्हें गहरी संतुष्टि देता है।
कई लाभार्थियों ने बताया कि उन्हें इस योजना के बारे में सबसे पहले अपने पड़ोसियों और रिश्तेदारों से पता चला। वे इस मौके को गंवाना नहीं चाहती थीं, इसलिए उन्होंने अपने बच्चों और परिवार के दूसरे सदस्यों को अपने साथ नज़दीकी आंगनवाड़ी केंद्र ले जाकर ज़रूरी कागज़ी कार्रवाई पूरी करने के लिए मनाया। यह मदद उनके लिए इसलिए भी ज़्यादा अहम है क्योंकि यह उन्हें मिल रही बुढ़ापा या विधवा पेंशन के अलावा दी जा रही है।
संगरूर की 109 साल की भरपूर कौर ने अपने पड़पोते की पत्नी की मदद से आवेदन की प्रक्रिया पूरी की और अब उनकी मदद से ही बैंक से पैसे निकालती हैं। उन्होंने यह रकम अपने बटुए में रखी है। वे कहती हैं, “मैं इस पैसे का कुछ हिस्सा अपनी बेटियों पर खर्च करूंगी, जो अब 50 साल से ज़्यादा की हो चुकी हैं, और बाकी पैसे से अपने लिए सुनने की मशीन (हियरिंग एड) खरीदूंगी। मुझे सुनने में दिक्कत होती है, लेकिन इसके अलावा मैं पूरी तरह स्वस्थ हूं। आज भी मैं घर का सारा काम खुद करती हूं। मुझे घुटनों में दर्द या कोई और बीमारी नहीं है। आज तक किसी सरकार ने ऐसा काम नहीं किया है।”
कोटपुरा की 110 साल की मुख्तियार कौर को भी इस योजना के तहत आर्थिक मदद मिली है। उन्हें सुनने में दिक्कत है, लेकिन वे साफ़-साफ़ बोल सकती हैं। वे कहती हैं कि उन्होंने यह रकम घर की ज़रूरतों पर खर्च की। वे कहती हैं, “मैंने पहले कभी किसी सरकार को पंजाब की महिलाओं को इतना सम्मान देते हुए नहीं देखा।”
फरीदकोट की 102 साल की जसमेल कौर ने अपनी ज़िंदगी का ज़्यादातर हिस्सा अपने परिवार की सेवा में बिताया है। उन्हें मिली मदद का इस्तेमाल भी उन्होंने अपने परिवार की भलाई के लिए किया। वे कहती हैं, “मैंने कुछ पैसे अपनी दवाइयों पर खर्च किए और कुछ पैसे अपनी बेटी को उसके पति के इलाज के लिए दिए।” मुस्कुराते हुए वे कहती हैं, “मुझे खुशी है कि भगवंत मान सरकार महिलाओं का इतना ख्याल रख रही है। इस उम्र में पैसा ही सबसे बड़ा सहारा होता है। हर काम के लिए इसकी ज़रूरत पड़ती है। अब तो सांस लेना भी मुश्किल लगता है।”
मोगा की 102 साल की प्रीतम कौर बहुत कमज़ोर हैं और उन्हें सुनने में भी दिक्कत होती है। उम्र की वजह से वे बहुत कम बोलती हैं, इसलिए उनके बेटे सिकंदर सिंह का कहना है कि 3,000 रुपये की इस मदद से उनकी माँ की ज़िंदगी थोड़ी आसान हो गई है।

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