नई दिल्ली, 15 अप्रैल : कांग्रेस नेता पवन खेड़ा को बुधवार को सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका लगा है। उच्चतम न्यायालय ने तेलंगाना उच्च न्यायालय के उस आदेश पर रोक लगा दी है, जिसमें उन्हें एक सप्ताह की ट्रांजिट अग्रिम जमानत दी गई थी। यह मामला असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा की पत्नी के खिलाफ लगाए गए आरोपों से जुड़ा है। न्यायमूर्ति जे.के. माहेश्वरी और न्यायमूर्ति ए.एस. चंदुरकर की पीठ ने असम सरकार की याचिका पर सुनवाई करते हुए पवन खेड़ा और अन्य को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। अदालत ने स्पष्ट किया कि फिलहाल हाईकोर्ट का आदेश प्रभावी नहीं रहेगा और अगली सुनवाई तीन सप्ताह बाद होगी।
असम सरकार का आरोप: ‘फोरम चूजिंग’ और प्रक्रिया का दुरुपयोग
सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने असम सरकार की ओर से दलीलें पेश कीं। उन्होंने कहा कि मामला असम में दर्ज होने के बावजूद पवन खेड़ा ने राहत के लिए तेलंगाना हाईकोर्ट का रुख किया, जो “फोरम चूजिंग” और प्रक्रिया के दुरुपयोग के बराबर है।
यह मामला 5 अप्रैल की प्रेस कॉन्फ्रेंस से जुड़ा है, जिसमें पवन खेड़ा ने असम के मुख्यमंत्री की पत्नी रिनिकी भुयान सरमा पर गंभीर आरोप लगाए थे। इसके बाद गुवाहाटी क्राइम ब्रांच ने उनके खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया था।
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